दार्जिलिंग :  होटलों में खाना खत्म, पर्यटकों से कहा- 'होटल छोड़िए'
शहर के होटलों में रुके पर्यटकों से मालिकों ने होटल खाली करने के लिए कह दिया है।


दार्जिलिंग : दार्जिलिंग में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग कर रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के आंदोलन की सबसे बड़ी मार वहां फंसे टूरिस्ट्स पर पड़ रही है। दार्जिलिंग में हिंसा के बाद स्थिति अब और खराब हो चली है। शहर के होटलों में रुके पर्यटकों से मालिकों ने होटल खाली करने के लिए कह दिया है। होटलों में खाने की कमी के कारण मालिक ऐसा कह रहे हैं। बता दें कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के बंद का आह्वान करने पर होटल मालिकों ने पर्यटकों को रुकने की अपील की थी। उस वक्त होटल प्रबंधन का तर्क था कि बाजार खुले रहेंगे और ट्रांसपॉर्ट पर कोई असर नहीं पड़ेगा। गुरुवार के बाद चीजें अचानक ही बदल गईं और जीजेएम ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी। 

एक होटल मालिक ने कहा, 'हम क्या कर सकते हैं? हमारे पास जरूरी चीजों की कमी हो गई है। यहां तक कि चावल और अनाज भी हमारे स्टॉक में खत्म होने के कगार पर हैं। अगर यह बंद इसी तरह चला तो हम नहीं कह सकते कि खाने-पीने के सामान की सप्लाइ कब तक हो सकेगी। ट्रांसपॉर्ट की भी दिक्कत है क्योंकि गाड़ियां नहीं चल रही। इन हालात में बेहतर यही है कि हम गेस्ट को चले जाने के लिए कहें।'

शुक्रवार की सुबह शहर से सुरक्षित निकलने के लिए बड़ी संख्या में लोग चौक बाजार बस स्टैंड पर जमा हुए। वहां आए लोगों में टूरिस्ट के साथ दिहाड़ी मजदूर और पुलिस भी थे। बस स्टैंड पर जो चीज नजर नहीं आ रही थी वह गाड़ियां थीं। कई पर्यटकों को तो मुख्य बस स्टैंड तक जाने के लिए 3-4 किमी. तक सामान के साथ पैदल चलना पड़ा। 

बुधवार को दार्जिलिंग पहुंचे कोलकाता के एक पर्यटक ने बताया, 'परिवार के साथ छुट्टियों के लिए यहां पहुंचे थे। हमारे साथ बच्चे और बुजुर्ग भी हैं। बच्चों को खिलाने के लिए भी खाने की कमी हो गई है। ऐसे में दार्जिलिंग में रुकने का कोई फायदा नहीं है। हम 5-6 किमी. चलकर बस स्टैंड तक पहुंचे हैं ताकि हमें कोई साधन मिल सके और हम वापस लौट जाएं।'

शुक्रवार को 18 लोगों का दार्जिलिंग से निकलने का इंतजाम किया गया। ये सभी लोग ओडिशा से एक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने आए थे। दार्जिलिंग में दिहाड़ी मजदूर और रोजगार के लिए आए लोग भी अपने घर लौट रहे हैं। पुलिस ने उम्र और लिंग के आधार पर बस स्टैंड पर पहुंचे लोगों को भेजने के लिए इंतजाम किए। पुलिस का उद्देश्य बुजुर्गों-महिलाओं को पहले सुरक्षित निकालना था। शुक्रवार को 4 बसें दार्जिलिंग से निकलीं जिनमें 2 नॉर्थ बंगाल ट्रांसपॉर्ट कॉर्पोरेशन और 2 निजी स्कूल की बसें थीं।

ट्रांसपॉर्ट अधिकारी राजेन सुंदस ने कहा, 'पर्यटकों को छोड़ने के लिए 5 बसों का इंतजाम किया गया है। टूरिस्ट पूरी तरह से पुलिस के नियंत्रण में हैं और सुरक्षित हैं। अगर कुछ और लोगों की मांग होगी तो हम शनिवार को भी वाहनों का इंतजाम करेंगे।' बसों की संख्या सुनिश्चित होने के बाद से ज्यादातर पर्यटकों ने राहत की सांस ली। हालांकि, सबको अपनी बारी के लिए कई घंटे इंतजार भी करना पड़ा। 


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