राष्ट्रपति चुनाव : आंकड़ों में मीरा पर कोविंद भारी
एनडीए प्रत्याशी कोविन्द स्पष्ट तौर पर बहुमत हासिल करते हुए 63 प्रतिशत वोट पाते दिख रहे हैं।


नई दिल्ली : देश के नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मंच सज चुका है और सोमवार को 14वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनत्रांतिक गठबंधन (एनडीए) के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद और विपक्ष की प्रत्याशी मीरा कुमार में चुनाव होगा। इस चुनाव में कोविंद का पलड़ा स्पष्ट तौर पर भारी दिख रहा है। 

राष्ट्रपति चुनाव में कुल पड़ने वाले वोटों की संख्या 10,98,903 है। एनडीए प्रत्याशी कोविन्द स्पष्ट तौर पर बहुमत हासिल करते हुए 63 प्रतिशत वोट पाते दिख रहे हैं। बीजेपी से जुड़े कोविंद के पास पार्टी के सभी सहयोगियों और कई क्षेत्रीय पार्टियों का समर्थन है। वहीं कांग्रेस और कुछ बड़ी विपक्षी पार्टियों ने बीजेपी के खिलाफ विचारधारा की इस लड़ाई में मीरा को मैदान में उतारा है। दोनों ही प्रत्याशी दलित समुदाय से आते हैं। 

वोटिंग के लिए सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। संसद भवन और राज्य विधानसभाओं में सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक वोटिंग प्रक्रिया चलेगी। मतों की गिनती 20 जुलाई को दिल्ली में होगी जहां विभिन्न राज्यों की राजधानियों से मत पेटियां लाई जाएंगी। नए राष्ट्रपति 25 जुलाई को पदभार संभाल लेंगे। 

इन चुनावों में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों के साथ ही राज्य विधानसभाओं के सदस्य भी मतदाता होते हैं। जहां एक सांसद के वोट की कीमत 708 होती है, तो वहीं विधायकों के वोट कीमत अलग-अलग राज्य के आधार पर बंटी होती है। यह निर्धारण उस राज्य विशेष की जनसंख्या के आधार पर होता है। 

मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल इस साल 24 जुलाई को पूरा हो रहा है। अब तक मुखर्जी समेत 13 लोग इस पद पर रह चुके हैं। इन चुनावों में कुल 4896 मतदाता, जिनमें 4120 विधायक और 776 सांसद शामिल हैं, अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिये पात्र हैं। राज्यों की विधान परिषद के सदस्य इस चुनाव में हिस्सा नहीं लेते। 

लोकसभा अध्यक्ष जहां इस चुनाव में मत डाल सकता है वहीं एंग्लो-इंडियन समुदाय से लोकसभा में नामित होने वाले दो सदस्यों को मतदान का अधिकार नहीं होता है। राज्यसभा के भी 12 नामित सदस्य इन चुनावों में मतदान के अयोग्य होते हैं। गोपनीय मतपत्र के जरिए होनो वाली वोटिंग में एनडीए के पास शिवसेना को मिलाकर कुल 5,37,683 वोट हैं और उसे करीब 12000 और मतों की जरूरत है। 

हालांकि बीजू जनता दल, तेलंगाना राष्ट्र समिति और वाईएसआर कांग्रेस से समर्थन के वादे और अन्नाद्रमुक के एक धड़े से समर्थन की संभावना, एनडीए के लिए राष्ट्रपति चुनावों में वोटों की कमी के अंतर को पूरा कर सकती है। 


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