रायबरेली हादसाः  NTPC पहुंचे राहुल गांधी, घायलों से की मुलाकात
सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में राहुल बॉयलर हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों से मुलाकात कर रहे हैं।


रायबरेली : उत्तर प्रदेश के रायबरेली NTPC में हुई दर्दनाक घटना के कारण कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपना गुजरात दौरा बीच में ही छोड़ रायबरेली पहुंच गए हैं। अपनी मां सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में राहुल बॉयलर हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों से मुलाकात कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि सोनिया की तबीयत ठीक नहीं है और इसलिए वह यहां नहीं आ सकी हैं। बता दें कि बुधवार को NTPC के बॉयलर में हुए जबर्दस्त धमाके में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं। यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है। 

इस दर्दनाक घटना की खबर के बाद राहुल ने रायबरेली का रुख किया। गुजरात में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं। राहुल गांधी चुनाव के सिलसिले में बुधवार को सूरत में थे। गुरुवार सुबह वह सूरत से रायबरेली के लिए निकले थे। लगभग दस बजे वह रायबरेली पहुंचे। बता दें कि रायबरेली कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। राहुल पोस्टमॉर्टम हाउस भी गए। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने मृतकों के परिजनों से मिलकर उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। राहुल ने एनटीपीसी प्लांट का भी दौरा किया। 

राहुल ने स्थानीय अस्पताल में घायलों से भी मुलाकात की। कांग्रेस उपाध्यक्ष घटना वाले जगह भी जा सकते हैं। इस बीच गंभीर रूप से घायल मजदूरों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर दिल्ली भेजा गया है। लगभग सौ वर्कर्स का रायबरेली, लखनऊ और इलाहाबाद के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

यहां हुआ था हादसा
रायबरेली ऊंचाहार एनटीपीसी में 500 मेगावॉट की यूनिट नंबर 6 के बॉयलर का स्टीम पाइप फटने से बुधवार को हादसा हुआ था। इस दर्दनाक हादसे में 200 से ज्यादा वर्कर्स घायल हुए हैं। बुधवार शाम लगभग 4 बजे हुए इस ब्लास्ट के बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल हो गया था। सीआईएसएफ (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) ने पूरे परिसर को घेर लिया था। घायलों को इलाज के लिए रायबरेली, इलाहाबाद के साथ लखनऊ भेजा गया। इस बीच पीएम मोदी ने एनटीपीसी हादसे पर दुख जताया है और मारे गए लोगों के परिवार वालों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। 

गर्म राख के ढेर में दब गए कर्मचारी
बॉयलर में बन रही स्टीम का तापमान 500 डिग्री के आस-पास तक चला जाता है। उसका वायुदाब भी इतना होता है कि उसके संपर्क में आने पर इंसानी शरीर के चीथड़े उड़ जाएं। एक घायल मजदूर ने बताया कि हादसे के वक्त करीब 25 लोग बॉयलर के काफी करीब थे। बॉयलर फटते ही कई लोग वहीं राख के मलबे में दब गए। इनमें से कुछ के शरीर क्षत-विक्षत हो गए। मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में गर्म राख के नाक और मुंह के रास्ते तेज रफ्तार से फेफड़ों तक पहुंच जाने से भी मौत हो सकती है। एक चश्मदीद ने हादसे की भयावहता को बयां करते हुए कहा कि ऐश पाइप से निकली राख से दस मीटर दूरी पर बॉयलर में मौजूद लोग मर-मर कर गिर रहे थे। चारों ओर धुआं-धुआं था। हवा में सिर्फ और सिर्फ राख ही तैरती दिख रही थी।

डीएम ने बनाई कमिटी
डीएम संजय कुमार ने बताया कि उन्होंने एनटीपीसी में हुई घटना की जांच के लिए एक कमिटी गठित की है। इस कमिटी में मैजिस्ट्रेट और तकनीकी विशेषज्ञों को रखा गया है। यह कमिटी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी।

मौत से लड़ने का भी मौका नहीं मिला
रात करीब 9 बजे प्लांट के आसपास केवल सन्नाटा पसरा था। प्लांट के गेट पर सीआईएसएफ के जवान लगे थे। बेहद मुस्तैद। किसी को भीतर जाने की इजाजत नहीं थी। गांव के कुछ लोग जैसे ही इस तरफ आते, उन्हें खदेड़ा जाने लगता। शिफ्ट बदलने पर निकलने वाले मजदूरों में हादसे को लेकर दहशत साफ महसूस की जा सकती थी। यहां काम करके निकले बिहार के रहने वाले अशोक कुमार पहले तो कुछ बोलने को तैयार नहीं हुए। गेट से कुछ दूर जाने के बाद बोले, यूनिट जिसमें हादसा हुआ, वह अब भी चल रही है। एक बॉयलर के नीचे 100 से 150 आदमी काम करते हैं, जबकि उस यूनिट में 300 से ज्यादा लोग एक बार में होते हैं। मजदूरों को अंदेशा है कि बॉयलर के नीचे काम करने वालों में शायद ही कोई बचा हो। 


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