दिल्ली में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं : NCRB रिपोर्ट
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले दिनों देश के 19 महानगरीय शहरों में NCRB के कराए गए अपराध विश्लेषणों की रिपोर्ट से यह बात सामने आई। 2016 के दौरान दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ 33.0% अपराध दर्ज किए गए हैं जिनमें 41,761 में से 13,803 अपराधिक मामले दर्ज किए गए। इसके बाद मुंबई 12.3%  (5,128) मामले दर्ज किए गए यानि कि 77.2 राष्ट्रीय औसत दर के मुकाबले में दिल्ली में सबसे अधिक 182.1 बताई गई है। दिल्ली शहर में लगभग 40% बलात्कार के मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा दहेज के कारण मौतों की संख्या में भी 29% है।

हिंसक अपराध
दिल्ली में अपहरण और अगवा करने के सबसे अधिक मामले (5,453) दर्ज किए गए हैं जो 2016 के दौरान कुल अपराधों के (48.%) बनता है। मुंबई 16.6% (1,876) मामले और बेंगलुरु में 7.8% (879) मामले क्रमश: दूसरे व तीसरे स्थान पर हैं। दिल्ली शहर हत्याओं के मामले में भी 21.8% के साथ नंबर एक पर है। कुल (2194 मामलों में 479) कत्ल यहां हुए। बेंगलुरु में 10.4% (229) और पटना 8.9% (195) मामलों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर है।

IPC और SLL अपराध
IPC और SLL अपराध महिलाओं के खिलाफ ज्यादा हैं। दिल्ली में कुछ IPC अपराधों में 38.8% है। इसके बाद बेंगलुरु में (8.9%) और मुंबई में (7.7%) का क्रमश: दूसरा और तीसरा नंबर है। SLL अपराधों के मामले में सबसे ज्यादा चेन्नई में 32.9% रिकॉर्ड किए गए। जो 19 महानगरीय शहरों में हुए कुल SLL के तहत है। यह आकड़े 2016 के हैं जिसके तहत कोच्चि (12.9%) सूरत (12.6%) से क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर है। 

कानून के साथ किशोर मामले
19 महानगरीय शहरों में से दिल्ली में किशोर अपराध मामलों की संख्या सबसे अधिक बताई गई है। 2016 में दिल्ली में ऐसे मामलों की संख्या 35.6% बताई गई यानि कि (2368) अपराधिक मामले दिल्ली में हुए।

आर्थिक अपराध
2016 के दौरान दिल्ली में आर्थिक अपराधों के तहत सबसे अधिक मामले (5492) दर्ज किए गए जोकि 19.36% बनते हैं। इसके बाद जयपुर 15.4 (4742) मामले और 13.6% के साथ मुंबई (4191) मामले दर्ज किए गए।

साइबर अपराध
2016 के दौरान मुंबई में साइबर अपराध सबसे अधिक बताए गए हैं। कुल (4172) मामलों में से 23.5% के साथ (980) साइबर अपराध मुंबई में दर्ज किए गए। महिलाओं के खिलाफ अपराध मामलों में 2015 की बजाए 2016 में 2.9% की वृद्धि हुई। महिलाओं के खिलाफ अधिकांस मामले पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा अत्याचारों के बनाए जाते है जिनकी संख्या (32.6%) है। महिलाओं के यौन शोषण मामले में (25.0%) दर्ज किए गए।  जबकि (19.0%) मामले बलात्कार और किडनैपिंग के दर्ज किए गए।



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