Pics : ‘खादी’ ही एक ऐसा कपडा है जो ठंडक में गर्मी और गर्मी में ठडक का अहसास देता है : नंदिता तिवारी
मेरे लिए खादी के कपडें अन्य कपड़ों से बिलकुल अलग है क्योकि हर कपडें का अपना एक अलग नेचर होता है.


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पायनियर एलायंस की मुहीम ‘अपना देश, अपना खादी’ में आज मिलिए मिस नंदिता तिवारी से. जो हाल ही में मिस इंडिया खादी फैशन शो में राजस्थान की तरफ ‘मिस खादी राजस्थान’ बनी है. पेश है खादी के कपड़ों पर उनसे हुई बात-चीत का ब्यौरा...
 


सवाल : फैशन की मौजूदा दौर में खादी के कपड़ों का कितना स्कोप देखती है आप ?

जवाब : अगर बात मैं फैशन की करूँ तो अभी तक फैशन की जितनी परिभाषा हम लोगों ने देखी है विशेषकर जब से हम सिनेमा के कांटेक्ट में आये है तो फैशन की परिभाषा सबकी नजरों में अलग-अलग है. मेरे लिए भी फैशन की परिभाषा अलग है. मेरे लिए फैशन का मतलब ऐसा कपडा है जिसमे मैं कम्फर्टेबल फील करूँ. तो अगर मैं खादी की बात करूँ तो खादी के कपडें हमारी बॉडी के लिए बहुत ही अच्छे है विशेषकर मौसम के अनुरूप तो ये बहुत ही अच्छा कपडा है क्योकि ये गर्मी में ठण्ड का अहसास करता है और ठंडक में गर्मी का. और अगर बात फैशन और ग्लैमर की करें तो अभी तक जितने भी मिस इंडिया खादी के स्टेट कंपीटिशन हुए है उसमे खादी के बेहतरीन कपडें आपको देखने को मिलेंगे जिसमे अलग अलग डिजाईनर्स ने बहुत ही अच्छा अपना टैलेंट दिखाया है और आज के फैशन के हिसाब से खादी के कपड़ों को ढाला है. इसलिए मुझे लगता है आने वाले समय में खादी का कपडा न केवल राष्ट्रीय स्तर बल्कि अन्तराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी धूम मचायेगा.

सवाल :आपकी समझ मे खादी के कपड़ों व अन्य कपड़ों में क्या बेसिक फर्क है ?
 
जवाब : मेरे लिए खादी के कपडें अन्य कपड़ों से बिलकुल अलग है क्योकि हर कपडें का अपना एक अलग नेचर होता है. बता अगर खादी की करूँ तो वैज्ञानिक तौर पर भी ये प्रूफ हो चुका है कि खादी के कपडें ठण्ड में गर्मी और गर्मी में ठण्ड देते है ठीक इसी प्रकार हर कपडें का अपना एक अलग प्रभाव हमारी बॉडी पर होता जैसे अगर बात हम टेरीकाट के कपड़ों की करें तो ये कपडें हमारी स्किन के लिए सही नहीं होते, ये हमारी स्किन को बहुत नुकसान पहुचातें है तो मैं कहना चाहती हूँ अपने देश से विशेषकर नौजवान पीढ़ी से कि हमे कपडें के विज्ञान की बेसिक जानकारी जरुर होनी चाहिए.

सवाल : क्या सिर्फ खादी के कपड़ें आज दौर में बिजनेस का माध्यम बन सकते है? 

उत्तर : देखिये ! अगर बात मैं सिर्फ खादी की करूँ तो ये बिलकुल हो सकता है क्योकि हम एक ऐसे देश है जहाँ में हम लोगों ने बहुत सालों तक अंग्रेजों की गुलामी करी है और खादी तो महात्मा गाँधी की देन है और बात अगर इसको बनाने की करें तो इसे हम अपने हाथों से बनाते है इसलिए बहुत ही छोटे लेवल से शुरू करकरे हम इसे बहुत ही उम्दा लेवल पर ले जा सकते हैं.



सवाल: क्या आपको लगता है कि पीएम के खादी फार नेशन के आने के बाद फैशन में कुछ परिवर्तन हुआ है ?

जवाब : जी बिलकुल हुआ है. मैं पिछले एक साल से मिस इंडिया खादी राजस्थान की विनर हूँ पर मैंने इससे पहले ही खादी के विषय में थोडा बहुत सुन लिया था. इस तरह अप कह सकते है कि थोड़ी बहुत जानकारी मुझे पहले से ही थी. थोडा बहुत हम पढ़ते आ रहे है बचपन से ही स्वदेशी मूवमेंट आदि के बारें में. खादी के कपडें बचपन से ही हमारे माता-पिता हमे पहनाते आ रहे हैं. इसके आलावा अगर मैं बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की करूँ तो उनके आने से इसमें जरुर बदलाव आये है क्योकि हमारे प्रधानमंत्री अब तक के सबसे स्टायलिश प्रधानमंत्री है और ये सिर्फ मैं नहीं कह रही हूँ बल्कि अंतराष्ट्रीय मीडिया कह रहा है. तो मुझे लगता है अगर कोई साइलेंट आइकन बन जाता है उसकी कही हुई बात या उसका पहनावा अपने आप में एक ट्रेंड बन जाता है. इसलिए PM के ‘खादी फार नेशन’ के आने के बाद से लगातार फैशन के ट्रेंड में बदलाव हो रहे है.


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