बैंकों में रखे लोगों के पैसे डूबने की बात अफ़वाह- जेटली
Arun jetly


नई दिल्ली, सरकार ने फाइनेंशियल रिजॉल्‍यूशन एंड डिपॉजिट बिल (FRDI) से जुड़ी लोगों की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की है. वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि बैंकों के डिपॉजिटर्स के वर्तमान सभी अधिकार न सिर्फ सुरक्षित रहेंगे, बल्कि उन अधिकारों को और मजबूत किया जाएगा. उन्‍होंने मुख्‍य धारा की मीडिया के साथ सोशल मीडिया पर चल रही तमाम खबरों और आशंकाओं को निराधार करार देते हुए कहा कि इस तरह की सभी बातें अफवाह हैं.

जेटली के ट्विट के बाद इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी एस सी गर्ग ने भी कहा कि एफआरडीआई बिल में किसी तरह की ऐसी कोई तब्‍दीली नहीं की जा रही है, जिससे बैंकों में जमा लोगों के पैसों पर किसी तरह की आंच आए. उन्‍होंने साफ कहा कि पीएसयू बैंकों में जमा लोगों के पैसे की गारंटी सरकार देती है, इसलिए उसकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं आ सकती है.

इससे पहले खबर थी कि केंद्र सरकार ने बैंकिंग रिफॉर्म प्रक्रिया के क्रम में 2017 के जून में एक ऐसे बिल को स्‍वीकृति दी है, जिसके तहत बैंकों में जमा लोगों के पैसे डूब सकते हैं. कहा गया था कि इस बिल में ऐसे प्रावधान हैं कि अगर कोई बैंक डूबने की कगार पर है तो उसमें जमा लोगों के पैसे वापस नहीं दिए जाएंगे. इस प्रावधान की जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल होते ही बड़ी संख्‍या में लोगों ने चिंता जतानी शुरू कर दी थी.

‘बेल-इन’ पॉवर्स

खबर के मुताबिक, सरकार अगर इस प्रावधान को लागू करती है तो इससे रिजॉल्‍यूशन कॉरपोरेशन नामक प्रस्‍तावित संगठन के पास काफी अधिक अधिकार होंगे. इस अधिकार को ‘बेल-इन’ पॉवर्स कहा जा रहा है और इस संगठन को डूबते बैंक को उबारने की जिम्‍मेदारी होगी. इस कॉरपोरेशन की स्‍थापना फाइनेंशियल रिजॉल्‍यूशन एंड डिपॉजिट बिल के तहत की जाएगी और किसी बैंक के डूबने की स्थिति में यह ‘बेल-इन’ पॉवर्स का यूज कर सकता है.

कहा जा र‍हा था कि ‘बेल-इन’ पॉवर्स के तहत बैंकों में पैसे जमा करने वाले डिपॉजिटर्स ही नहीं, बल्कि बैंकों के क्रेडिटर्स (जिनसे बैंकों ने पैसे लिए हैं, जैसे निवेशक) के भी पैसे नहीं लौटाए जाएंगे. यह प्रावधान ‘बेलआउट’ के विपरीत है.

शीतकालीन सत्र में पेश होगा बिल
इस समय इस बिल पर एक संसदीय समिति विचार कर रही है. सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में इसे पेश कर सकती है.

अवधि में बदलाव की भी थी बात
अफवाह थी कि अगर आपने 10 लाख रुपये 5 साल के लिए अपने बच्‍चे की पढ़ाई या शादी के बारे में सोचकर बैंक में जमा किए हैं, तो आपकी सहमति लिए बगैर इस अवधि को 20 साल करने का कॉरपोरेशन के पास अधिकार होगा. बैंक को कॉन्‍ट्रैक्‍ट या एग्रीमेंट के तहत डिपॉजिटर्स को पैसे वापस नहीं करने की एक तरह से छूट मिल जाएगी.

कहा यह भी जा रहा था कि मान लीजिए अगर बैंक में आपके 10 लाख रुपए हैं तो या तो यह रकम कम होकर एक लाख रुपए हो सकती है या फिर इसे फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट में कन्‍वर्ट किया जा सकता है. इस तरह आपकी रकम 5 साल या उसके बाद महज 5 फीसदी की ब्‍याज दर के साथ आपको मिलेगी. यह रकम एक लाख इसलिए हो जाएगी, क्‍योंकि डिपॉजिटर इंश्‍योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन- 1978 के तहत डिपॉजिटर्स को कम से कम 1 लाख रुपए देने का प्रावधान है. और आप इस मामले में कुछ नहीं कर सकते हैं. किसी भी अदालत में इस प्रावधान को चुनौती नहीं दी जा सकती है.

साइप्रस में हुआ था बेल-इन का उपयोग
बेन-इन प्रावधान का उपयोग 2013 में साइप्रस में किया गया था, जहां डिपॉजिटर्स की आधी रकम खत्‍म हो गई थी.


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