सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, दोबारा की जा सकती है राजीव गांधी हत्याकांड की जांच?
केंद्र सरकार ने इस मामले पर अपना हलफनामा दायर कर कहा कि वह पेरारिवलन की सजा निलंबित करने पर कोई फैसला नहीं कर सकता।


नई दिल्ली : पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी हत्याकांड मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि सीबीआई जांच कर रहे तत्कालीन एसपी त्यागराजन के हलफनामे के बाद क्या इस मामले की दोबारा जांच की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस सवाल का जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को 24 जनवरी तक का समय दिया। इस मामले पर अगली सुनवाई 24 जनवरी को होगी।

आज केंद्र सरकार ने इस मामले पर अपना हलफनामा दायर कर कहा कि वह पेरारिवलन की सजा निलंबित करने पर कोई फैसला नहीं कर सकता, क्योंकि इस मामले पर कोर्ट सुनवाई कर रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सवाल है कि सजा निलंबित करने पर फैसला केंद्र लेगा या राज्य। लेकिन हम आपसे खासकर पूछ रहे हैं कि आपका सीबीआई के तत्तकालीन अधिकारी त्यागराजन के हलफनामे पर क्या कहना है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता पेरारिवलन से कहा कि केवल सजा निलंबित करने तक अपने को सीमित मत कीजिए बल्कि आप केस को दोबारा खोलने के लिए दलील दीजिए।

पिछले 14 नवंबर को राजीव गांधी हत्याकांड की सीबीआई जांच कर रहे तत्कालीन एसपी त्यागराजन ने कहा था कि उन्होंने जान-बूझकर जांच रिपोर्ट से ये हिस्सा हटा दिया था कि उसे 19 वर्षीय अभियुक्त पेरारिवलन के उस हिस्से को हटा दिया था जिसमें उसने कहा था कि वो ये नहीं जानता है कि वह दो बैटरियां क्यों लाया। उसने ये बैटरियां खरीदीं और सिवरासन को सौंप दिया। इस खुलासे के बाद पेरारिवलन ने अपनी सजा को निलंबित करने की मांग की।

पेरारिवलन के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि लिट्टे के तत्कालीन मुख्य हथियार निर्माता केपी उस समय श्रीलंका की जेल में था। तब जांच एजेंसियों ने आईडी के इस्तेमाल को लेकर उससे पूछताछ क्यों नहीं की जबकि एक 19 वर्षीय युवक पेरारिवलन से पूछताछ की गई थी जिसने केवल बैटरी लाकर दी थी । वो पिछले 23 सालों से जेल में बंद है । उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या आप भी तमिलनाडु सरकार की इस मांग से सहमत हैं कि पेरारिवलन की उम्रकैद की सजा को खत्म कर दिया जाए। 

पिछले 23 अगस्त को सीबीआई ने आईईडी के इस्तेमाल के बारे में सीलबंद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी। उसके पहले 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर मल्टी डिसिप्लीनरी मानिटरिंग एजेंसी (एमडीएमए) की जांच के बारे में स्टेटस रिपोर्ट मांगा था। कोर्ट ने बम बनाने में बड़ी साजिश रचने के एंगल पर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक दोषी पेरारिवलन से पूछा था कि आप केवल साजिश के एंगल यानि बेल्ट बम के निर्माण और उसकी डिलीवरी की मांग कर रहे हैं| हम उस पर भी विचार करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। पेरारिवलन ने 16 अगस्त को एमडीएमए की जांच में कई गड़बड़ियों से संबंधित रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी।

एफआईआर के मुताबिक पेरारिवलन ने 9 वोल्ट की दो बैटरियां बम बनाने के लिए दी थीं। याचिकाकर्ता के वकील पीराबु सुब्रमण्यम ने कहा कि एमडीएमए की जांच उसके खिलाफ लगे आरोपों पर स्थिति स्पष्ट कर देगा। कोर्ट ने कहा कि बम बनाने में साजिश के एंगल का मामला याचिकाकर्ता के लिए दोबारा केस खोल सकता है।


अधिक देश की खबरें

अमृतसर रेल हादसाः ड्राइवर ने कहा, 'मैंने ब्रेक लगाया लेकिन ट्रेन रुकी नहीं, लोग पत्थर फेंकने लगे तो बढ़ा दी स्पीड'..

अमृतसर में दशहरा उत्सव के दौरान हुए रेल हादसे में 61 लोगों की मौत के बाद जीआरपी ... ...