पढ़िए ! क्या है चारा घोटाला और कैसे लालू यादव आये इसके गिरफ्त में
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नई दिल्ली, बिहार के 21 साल पुराने चारा घोटाला मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट अपना फैसला सुनाने वाली है. इस घोटाले में बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और डॉ. जगन्नाथ मिश्र सहित 22 आरोपी हैं.

चारा घोटाला बिहार का सबसे बड़ा घोटाला था, जिसमें पशुओं को खिलाए जाने वाले चारे के नाम पर 950 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से फर्जीवाड़ा करके निकाल लिए गए. इस घोटाले के कारण लालू यादव को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

असल में यह सारा घोटाला बिहार सरकार के खजाने से गलत ढंग से पैसे निकालने का है. कई सालों में करोड़ों की रकम पशुपालन विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों ने राजनीतिक मिली-भगत के साथ निकाली है.

भ्रष्टाचार का दूसरा नाम था बिहार पशुपालन विभाग

1989 के बाद बिहार की सत्ता में लालू के आने के बाद बिहार सरकार का पशुपालन विभाग भ्रष्टाचार का दूसरा नाम बन गया. भारत के तत्कालीन नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक टीएन चतुर्वेदी ने कहा था कि बिहार राजस्व विभाग के हर महीने के अकाउंटिंग में हमेशा देरी होती थी.

सरयू राय और सुशील मोदी ने विधानसभा में उठाया मामला
बीजेपी नेता सरयू राय, सुशील मोदी और शिवानंद तिवारी ने 1994 में बिहार विधानसभा में यह मामला उठाया था. तीनों नेताओं ने इस मामले में कई दस्तावेज भी पेश किए थे. इसके बाद वित्त सचिव विजय शंकर दुबे ने जिले के विभिन्न विभागों में जांच के आदेश दिए थे. आईएएस अधिकारी अमित खरे ने अपनी टीम के साथ बिहार पशुपालन विभाग के चाईबासा ऑफिस में छापा मारा था, जिसके बाद 950 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया.

चाईबासा ऑफिस में पड़ा छापा
चाईबासा ऑफिस से टीम ने कई फर्जी बिल और वाउचर्स भी बरामद किए थे. फर्जी बिलों के जरिए पशुओं के चारे के लिए सरकारी खजाने से पैसे निकाले गए थे. इसमें पशुपालन विभाग के करीब 80 कर्मचारियों को संलिप्त पाया गया था. पशुपालन विभाग के रिजनल डायरेक्टर श्याम बिहार सिन्हा ने फर्जी बिल के जरिए व्यक्तिगत रूप से 50 लाख रुपये निकाले थे. सिन्हा लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाते हैं.

कैसा आया लालू का नाम?
धीरे-धीरे मामला खुलता गया. इसके बाद जॉर्ज फर्नांडीस और नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव पर इस घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया. दोनों ने लालू की आय से अधिक संपत्ति पर भी सवाल उठाए. तत्कालीन बिहार बीजेपी अध्यक्ष सुशील मोदी ने 1997 में लालू के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में पीआईएल दायर की और इस केस की सीबीआई जांच की मांग की. इसी साल चारा घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, जिसके बाद लालू की मुश्किलें बढ़ गई. दबाव बढ़ने पर लालू को सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी. लालू ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सीएम बना दिया.

सीबीआई ने चार्जशीट फाइल की और लालू को जेल जाना पड़ा. राबड़ी 2005 तक सीएम बनी रहीं. हालांकि, 2010 में आय से अधिक संपत्ति मामले में लालू और राबड़ी को कोर्ट से राहत मिल चुकी है.

6 मामलों के आरोपी हैं लालू
झारखंड बनने के बाद 2001 में चारा घोटाला मामला रांची ट्रांसफर हो गया. इस घोटाले में कुल 64 केस दर्ज हुए हैं. लालू और पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र के खिलाफ छह मामलों में चार्जशीट फाइल की गई है.

सीबीआई कोर्ट ने लालू और जगन्नाथ मिश्र को 2013 में आरोपी मानते हुए 5 साल और 4 साल कैद की सजा सुनाई. हालांकि, दिसंबर 2013 में लालू को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई.

चारा घोटाला में लालू यादव पर 6 अलग-अलग मामले लंबित हैं और इनमें से एक में उन्हें 5 साल की सजा हो चुकी है. इस घोटाले से जुड़े 7 आरोपियों की मौत हो चुकी है जबकि 2 सरकारी गवाह बन चुके हैं और एक ने अपना गुनाह कबूल कर लिया और एक आरोपी को कोर्ट से बरी किया जा चुका है.


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