आज आएगा आम बजट, वित्त मंत्री पर टिकी सबकी निगाहें
आज आएगा आम बजट, वित्त मंत्री पर टिकी सबकी निगाहें


नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली आज लगातार 5वीं बार आम बजट पेश करेंगे। ऐसे में देश ही नहीं, पूरी दुनिया की नजर वित्त मंत्री अरुण जेटली पर टिकी हुई है। अब देखना यह है कि जेटली बजट में क्या-क्या घोषणाएं करते हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली 11 बजे बजट भाषण शुरू करेंगे। वैसे देश के सर्विस क्लास, युवा, किसान और इंडस्ट्री की उम्मीदों को पूरा करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। 

मोदी सरकार के इस आखिरी पूर्णकालिक बजट में वित्त मंत्री लोकलुभावन योजनाओं का ऐलान कर 2019 के आम चुनावों पर निशाना साधेंगे की कोशिश करेगी। इस साल आठ राज्यों में विधानसभा फिर लोकसभा चुनाव होने है। ऐसे में पूर्ण बजट पेश करने के आखिरी मौके पर मोदी सरकार जितना ध्यान अर्थव्यवस्था का रखेगी, उससे ज्यादा मतदाताओं पर नजर होगी। मोदी सरकार के लिए मौका अर्थव्यवस्था को सुस्ती, बेरोजगारी और कृषि को बदहाली के ग्रहण से निकालने का होगा। 

जीएसटी लागू होने के बाद पहला बजट

देश में जीएसटी लागू होने के बाद यह पहला बजट है। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में मोदी सरकार लोकलुभावन वादों की बजाय विश्वसनीयता पर जोर देगी। उनका मानना है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली तेल की बढ़ती कीमतों, रोजगार के अवसर पैदा करने और किसानों की आय बढ़ाने जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

इन क्षेत्र में विशेष जोर

-सब चुनौतियों को देखते हुए माना जा रहा है कि बजट में वित्त मंत्री जेटली युवाओं, महिलाओं, गांव, नौकरीपेशा लोगों, किसान, स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष जोर दे सकते हैं। 
-जेटली अगले वित्त वर्ष में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर तीन लाख कर सकते हैं। वर्तमान में इनकट टैक्स में छूट की सीमा ढाई लाख रुपये है। 
-बजट में महिलाओं को इनकम टैक्स में अतिरिक्त छूट दी जा सकती है।
-टैक्स छूट ज्यादा दी तो वित्तीय घाटे को जीडीपी का 3 प्रतिशत रखना काफी मुश्किल होगा।
-वित्त मंत्री बजट में रोजगार देने वाली कंपनियों को टैक्स देने की घोषणा कर सकते हैं। सरकार यह ऐलान कर सकती है कि जो कंपनी, जितना ज्यादा रोजगार देगी, उतना ज्यादा टैक्स में छूट मिलेगी। 
-आगामी चुनावों में किसानों की नाराजगी भारी पडऩे की आशंका है, ऐसे में खेती की लागत कम करके या किसानों की इनकम बढ़ाने की ठोस योजना के रूप में राहत की उम्मीद है। लेकिन चुनौती यह है कि वह किसानों को सीधे पैसा दे या कर्ज माफ करे। 


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