BJP से गठबंधन रहे या नहीं, चंद्रबाबू नायडू आज मीटिंग में लेंगे फैसला
CHANDRABABU-NAIDU


नई दिल्ली, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तेलगू देशम पार्टी (TDP) में बढ़ती तल्खियों के बीच बीजेपी-टीडीपी का गठबंधन आगे बरकरार रहेगा या नहीं, इसका फैसला आज हो सकता है. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को अमरावती में टीडीपी के सीनियर नेताओं और सांसदों की मीटिंग बुलाई है. मीटिंग में 'गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेस गठबंधन' यानी तीसरा मोर्चा (थर्ड फ्रंट) पर भी फैसला लिया जा सकता है.

लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर एक बार फिर 'तीसरा मोर्चा' की सुगबुगाहट तेज हो गई है. ऐसे में चंद्रबाबू नायडू एक बार फिर से 'थर्ड फ्रंट' बनाने की कोशिश में जुटे हैं, जैसा कि उन्होंने दो दशक पहले किया था. भारतीय राजनीति के इतिहास में 'थर्ड फ्रंट' पहली बार 1996 में कांग्रेस के बाहरी समर्थन से अस्तित्व में आया था. बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए चंद्रबाबू नायडू ने 'तीसरा मोर्चा' बनाने में अहम भूमिका निभाई थी.

तेलगू देशम पार्टी के एक सांसद ने कहा, "पिछले साढ़े तीन साल से हम अपनी मांगों को उठा रहे हैं. इस बार के बजट में उम्मीद थी कि सरकार आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा और स्पेशल पैकेज देगी, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं दिया. बजट से आंध्र प्रदेश के लोग खुद उपेक्षित सा महसूस कर रहे हैं."

उन्होंने कहा, "अगर हमें 2019 के चुनाव में उतरना है, तो हमें उन मुद्दों को उठाना होगा, जिनका निपटारा केंद्र सरकार ने नहीं किया." टीडीपी सांसद ने कहा, " पांच साल पहले राज्य के बंटवारे के बाद केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा और स्पेशल पैकेज देने का वादा किया था, जो अभी तक पूरे नहीं हुए."

बता दें कि नायडू इसके पहले भी 'थर्ड फ्रंट' को लेकर संकेत दे चुके हैं. हाल ही में उन्होंने कहा था, 'बीजेपी को लेकर टीडीपी ने हमेशा मित्र धर्म निभाया है. लेकिन, बीजेपी अलग राह पर चल रही है. अगर वो गठबंधन नहीं चलाना चाहते हैं तो हम अकेले जाने को तैयार हैं.’

हालांकि, नायडू के धुर विरोधी वाईएसआर कांग्रेस अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी इस मौके को भुनाने की कोशिश में जुट गए हैं. हाल के दिनों में उनकी लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है. रेड्डी पहले के मुकाबले ज्यादा परिपक्‍व नजर आ रहे हैं. हाल ही में उन्होंने कहा था कि अगर केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने को तैयार हो जाए, तो वो बीजेपी के साथ जा सकते हैं.

2019 में लोकसभा चुनाव के साथ-साथ आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी होने हैं. ऐसे में जगमोहन रेड्डी के अलावा चंद्रबाबू नायडू पर ज्यादा दबाव है. ताकि, आगामी चुनाव में भी उनकी सरकार बनी रहे.


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