नशा करने वाले लोगों में एचआईवी संक्रमण का खतरा अधिक
71 प्रतिशत नशा करने वाले लोगों को ही एचआईवी


नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले लोगों में एचआईवी संक्रमण का खतरा सर्वाधिक रहता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 71 प्रतिशत नशा करने वाले लोगों को ही एचआईवी जांच मिल पा रही है।

डा. रमाकान्त ने इण्डियन एड्स सोसाइटी का हवाला देते हुए हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि भारत में जो अनुमानित 21 लाख लोग एचआईवी के साथ जीवित हैं। उनमें से 7.54ः 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हैं और 40.5 महिलाएं हैं।
 वैज्ञानिक प्रमाण यह है कि एचआईवी की पोसिटिव जाँच होते ही एंटी-रेट्रो-वायरल (एआरटी) दवा व्यक्ति को मिलनी चाहिए तभी वो सामान्य जीवन जी सकता है और उससे किसी को संक्रमण फैलने की सम्भावना भी नगण्य हो सकती है।  बड़ी संख्या में एचआईवी के साथ जीवित लोग इस बात से अनभिज्ञ हैं कि वे एचआईवी पोसिटिव हैं. 21 लाख एचआईवी पोसिटिव लोगों में से 1495400 को ही एचआईवी संक्रमण होने की जानकारी है।
यदि सभी को एआरटी दवा मिल रही होती. जब तक सभी एचआईवी के साथ जीवित लोगों को एआरटी दवा नहीं मिलेगी तब तक कैसे एचआईवी संक्रमण होना मात्र एक स्थायी-प्रबंधनीय रोग हो सकेगा और लोग सामान्य जीवन व्यतीत कर सकेंगे?
 भविष्य में किसी ‘जादुई’ एड्स इलाज की उम्मीद में हम आज वर्त्तमान को धूमिल नहीं कर सकते क्योंकि प्रभावकारी कार्यक्रमों की जानकारी हमें उपलब्ध है और हर एचआईवी के साथ जीवित व्यक्ति की जिंदगी में इस संक्रमण को स्थायी-प्रबंधनीय रोग बनाना जन-स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय दोनों के लिए अनिवार्य है।


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