अयोध्या से रामराज्य रथ यात्रा 13 फरवरी को, सीएम योगी नहीं होंगे शामिल!
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लखनऊ, अयोध्या के कारसेवकपुरम से मंगलवार को रामराज्य रथ यात्रा की शुरुआत होने जा रही है. पहले इस यात्रा को लेकर कहा जा रहा था कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसे हरी झंडी दिखा सकते हैं. लेकिन अब इस रथ यात्रा को विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री चम्पत राय हरी झंडी दिखाएंगे. अयोध्या से रामेश्वरम तक की ये रथ यात्रा 41 दिनों तक चलेगी. इस दौरान यात्रा 6 राज्यों से होते हुए 6 हजार किलामीटर सफर तय करेगी. इस यात्रा की पांच प्रमुख मांगे हैं, जिनमें राम मंदिर निर्माण, राम राज्य और स्कूल के पाठ्यक्रम में रामायण को शामिल किया जाना प्रमुख है.

इस रथ यात्रा के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी बीजेपी एक बार फिर भगवान राम के शरण में है. पार्टी जहां एक तरफ ओरछा के ‘राम राजा सरकार’ के दरबार में 14-15 फरवरी को दो दिवसीय शिविर लगाकर अपनी रणनीति का मंथन करने जा रही है, वहीं 13 फ़रवरी से भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या से रामेश्वरम तक राम राज्य यात्रा निकालने जा रही है.

लगभग डेढ़ महीने तक चलने वाली यह यात्रा छह राज्यों से होकर गुजरेगी और 23 मार्च को रामेश्वरम पहुंचेगी. इस के दौरान जगह-जगह कई सभाएं भी होंगी. इन सभाओं के जरिए अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, रामराज्य की स्थापना व रामायण को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग होगी.

अयोध्या से शुरू हो रही इस रथयात्रा में दक्षिण भारत के प्रमुख संत स्वामी कृष्णानंद सरस्वती भी रहेंगे. यह यात्रा नंदीग्राम, इलाहाबाद, सागर, चित्रकूट, छतरपुर, भोपाल, उज्जैन, इंदौर, ओंकारेश्वर, त्र्यम्बकेश्वर, वाराणसी, नारायणपुर, विजयपुरा, किष्किंधा बेलारी, बंगलुरू, मैसूर, कन्नूर होते हुए 23 मार्च को रामेश्वरम पहुंचेगी. 25 मार्च को तिरुवनंतपुरम पहुंचकर समाप्त हो जाएगी.

माना जा रहा है कि इस यात्रा के जरिए हिंदू संगठन और भगवा टोली एक बार फिर उत्तर से लेकर दक्षिण तक राम मंदिर के मुद्दे पर माहौल तैयार करेगी. यह ठीक वैसा ही है जैसा कि लाल कृष्ण आडवाणी ने 90 के दशक में रथ यात्रा निकाल कर किया था. कहा जा रहा है कि इस यात्रा के पीछे 2019 के लोक सभा चुनाव की तैयारियां भी छिपी हुई हैं.


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