मालदीव संकटः विपक्ष ने बताया इमरजेंसी को अवैधानिक
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नई दिल्ली, मालदीव में जारी इमरजेंसी को 30 और दिनों के लिए बढ़ाने का मालदीव के विपक्ष ने विरोध किया है व इसे अवैधानिक बताया है. विपक्ष का कहना विपक्ष का कहना है ये इमरजेंसी अवैधानिक है व इसे लागू करने के लिए नियमों को नज़रअंदाज़ किया गया है.

संयुक्त विपक्ष के नेता इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने कहा कि चूंकि राष्ट्रपति अबदुल्ला यामीन इमरजेंसी लगाने के लिए सांसदों की ज़रूरी संख्या नहीं जुटा सके इसलिए यह इमरजेंसी अवैधानिक है. उन्होंने कहा कि अब्दुल्ला यामीन ने पूरे देश को हाईजैक कर लिया है और वो एक मिलिट्री डिक्टेटर की तरह राज कर रहे हैं. संयुक्त विपक्ष ने मांग की कि राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को संसद से तुरंत सेना को हटा लेना चाहिए ताकि संसद ठीक ढंग से काम कर सके.

उन्होंने कहा कि चूंकि यामीन सरकार द्वारा लगाई गई इमरजेंसी अवैधानिक है इसलिए इस दौरान लागू किए गए सारे नियम भी गैर-कानूनी हैं. इमरजेंसी के कारण नज़रबंद किए गए सभी नागरिकों को तुरंत मुक्त कर दिया जाना चाहिए.

आपको बता दें कि मालदीव में जारी इमर्जेंसी भारत के विरोध के बावजूद 30 और दिनों के लिए बढ़ा दी गयी. इस बारे में राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के अनुरोध को वहां की संसद में मंजूरी मिल गई है. मालदीव के मीडिया के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर वोटिंग के लिए सत्ताधारी प्रोग्रेसिव पार्टी के 38 सांसद जुटे, जबकि संविधान के मुताबिक 43 सांसदों की मौजूदगी जरूरी थी. विपक्षी सांसदों ने वोटिंग का बहिष्कार किया, तब इन 38 सांसदों ने ही राष्ट्रपति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी.

हालांकि भारत ने किसी भी तरह के सैन्य हस्तक्षेप की बात नहीं कही है. विदेश मंत्रालय ने कहा था कि हमारी उम्मीद है कि मालदीव सरकार इस इमर्जेंसी को आगे नहीं बढ़ाना चाहेगी ताकि मालदीव में राजनीतिक प्रक्रिया तुरंत शुरू हो सके.

मालदीव में 5 फरवरी को लागू हुआ था आपातकाल
मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने 1 फरवरी को पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद के खिलाफ मुकदमे पर रोक लगा दी थी. साथ ही 9 विपक्षी सांसदों की बहाली का भी आदेश दिया था. मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने कोर्ट का ये फैसला मानने से इनकार कर दिया था. जिसके बाद उन्होंने संसद भंग कर दी थी. इसके बाद 5 फरवरी को राष्ट्रपति यामीन ने 15 दिन के लिए आपातकाल की घोषणा की थी, जिसकी मियाद मंगलवार को खत्म हो रही थी.

आपातकाल के 15 दिन पूरे होने पर भारत ने भी मालदीव सरकार से इसे आगे न बढ़ाने की उम्मीद जताई थी. बावजूद इसके मालदीव सरकार ने आपातकाल को और बढ़ा दिया.

नशीद सरकार ने तख्तापलट का लगाया था आरोप
वर्ष 2008 में चुनाव जीतकर नशीद मालदीव के राष्ट्रपति बने थे. लेकिन वर्ष 2012 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. तब मोहम्मद नशीद ने यह आरोप लगाया था कि उन पर सेना और पुलिस के जरिये दबाव बनाकर इस्तीफा दिलवाया गया. नशीद ने इसे तख्तापलट कहा था. मोहम्मद नशीद इलाज के लिए लंदन चले गए थे. इसके बाद उन्होंने वहीं शरण ले ली. वह तभी लंदन में हैं.


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