पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किल, तीन माह के लिए ग्रे सूची में डाला गया
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इस्लामाबाद, पाकिस्तान को आखिरकार आतंकवाद को पनाह देना भारी पड़ गया. आतंकवाद विरोधी वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानूनों का सबसे कम प्रयास करने के लिए पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में रखा गया है.  पेरिस में फाइनेंशल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की बैठक में तुर्की को छोड़कर सभी सदस्य देशों ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने के लिए वोट किया. पाकिस्तान को पहले तीन महीने के लिए ग्रे लिस्ट में डाला गया है और इसके बाद इसे अगले तीन माह के लिए और आगे बढ़ाया जाएगा.

गौरतलब है कि पिछले महीने ही अमेरिका ने पाकिस्तान को मिलने वाली दो बिलियन डॉलर (लगभग 13 हजार करोड़ रुपये) की सहायता राशि पर रोक लगा दी थी. पाकिस्तान को पहले ही इस बात की खबर लग गई थी कि उसे ग्रे सूची में रखा जा सकता है जिसके कारण ही उसे हाफिज सईद के संगठन पर बैन लगा दिया था और संगठन से जुड़ी सभी संपत्तियों को जब्त कर लिया था. पाकिस्तान के ग्रे सूची में डाले जाने से 300 अबर डॉलर की अर्थव्यवस्था का नुकसान हो सकता है.

FATF की निगरानी में आने से क्या होता नुकसान?
FATF एक अंतरसरकारी संस्था है जो गैरकानूनी फंड के खिलाफ मानक तय करती है. पाकिस्तानी अधिकारियों और पश्चिमी राजनयिकों का मानना ​​है कि FATF की निगरानी में शामिल होने से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा सकता है. इससे विदेशी निवेशकों और कंपनियों को पाकिस्तान में बिज़नेस करने में काफी दिक्कत होगी. इसके अलावा पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय कर्ज बाजारों से पैसा उधार लेना भी मुश्किल होगा.


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