कर्नाटक चुनाव: पहली बार एक साथ चुनाव लड़ेंगे बाप-बेटे, बेटी-दामाद भी लाइन में
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कर्नाटक में बीजेपी और कांग्रेस जोश-शोर से चुनाव प्रचार में जुटी है. राज्य के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब मौजूदा मुख्यमंत्री और उनके बेटे एक साथ विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं. अब तक नौ विधानसभा चुनाव लड़ चुके सिद्धारमैया ने अपने डॉक्टर बेटे यथींद्र के लिए वरुणा विधानसभा सीट छोड़ने का फैसला लिया है. इस चुनाव में सिद्धारमैया मैसूर जिले से सटे चामुंडेश्वरी सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे.

साल 1994 में ऐसा ही हुआ था, जब जनता दल के प्रमुख और मुख्यमंत्री उम्मीदवार एचडी देवगौड़ा ने अपने बेटे एचडी रेवन्ना के लिए हसन जिले की होलेनारसीपुरा सीट छोड़ दी थी और बेंगलुरु के पास रामनगर सीट से चुनाव लड़े थे. दोनों ने चुनाव जीत लिया था. इसके बाद एचडी देवगौड़ा 18 महीने तक कर्नाटक के सीएम रहे. बाद में प्रधानमंत्री भी बने.

ऐसा नहीं है कि सिर्फ सिद्धारमैया ही अपने बेटे के लिए 'बैटिंग' कर रहे हो. कांग्रेस के कई मंत्री और नेता भी अपने बेटे-बेटियों के लिए 'लॉबिंग' कर रहे हैं. करीब 15 कांग्रेस नेता ऐसा कर रहे हैं. वहीं, राज्य में मुख्य विपक्ष बीजेपी और थर्ड प्लेयर जेडीएस भी इसी तरह की समस्या का सामना कर रही है.

पांच बार चामुंडेश्वरी सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके सिद्धारमैया
1983 से 2008 के बीच सिद्धारमैया ने पांच बार चामुंडेश्वरी सीट का प्रतिनिधित्व किया था. परिसीमन या सीमांकन के बाद वह वरुणा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने लगे. अपने राजनीतिक वारिस और बड़े बेटे राकेश की 2016 में बेल्जियम में मौत के बाद सिद्धारमैया ने अपने छोटे बेटे यथींद्र पर राजनीति में आने के लिए जोर दिया.

पहले तो यथींद्र राजनीति में एंट्री को लेकर कोई रुचि नहीं ली थी. लेकिन, हाल के महीनों में उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी को लेकर कई बार विचार किया, फिर चुनाव लड़ने का फैसला लिया.

इसलिए राजनीति में आ रहे यथींद्र
सिद्धारमैया ने कहा, "लोगों की मांग थी कि यथींद्र वरुणा से चुनाव लड़े. इसलिए मैंने अपनी पुरानी सीट पर वापस जाने का फैसला लिया. मेरा बेटा तभी चुनाव लड़ेगा, जब कांग्रेस हाईकमान उसके नॉमिनेशन पर मंजूरी देगी. टिकट को लेकर मैं कोई फैसला नहीं कर सकता."

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमिटी (KPCC) के एक पदाधिकारी के मुताबिक, 15 से ज्यादा मंत्रियों और टॉप नेताओं ने दो सीटों की मांग की है. एक सीट से वे खुद चुनाव लड़ेंगे और दूसरे सीट से उनके बेटे या बेटी को चुनावी मैदान में उतारेंगे. पीडब्ल्यूडी मंत्री डॉ. एचसी महादेवअप्पा के बेटे सुनील बोस मैसूर जिले के टी. नरासीपुरा सीट से उम्मीदार हैं, वर्तमान में इस सीट से उनके पिता विधायक हैं. इस चुनाव में महादेवअप्पा सेंट्रल बेंगलुरु के सीवी रमन नगर सीट से ताल ठोकेंगे.

ये लोग भी लगे हैं लाइन में
इसी तरह कानून और संसदीय मामलों के मंत्री टीबी जयचंद्र के बेटे संतोष टुमकुर जिले के चिकन्याकानाहाल्ली सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे. शहरी विकास मंत्री आर. रोशन बेग ने पार्टी हाईकमान से कहा है कि उनकी सीट उनके बेटे रेहन बेग को दी जाए. रोशन बेग खुद राज्यसभा जाना चाहते हैं. वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री के. रहमान खान की इच्छा है कि पार्टी उनके बेटे मंसूर अली खान को साउथ बेंगलुरु के जयनगर से टिकट दे. उधर, गृहमंत्री आर. रामालिंग रेड्डी अपनी बेटी सौम्या रेड्डी भी इसी सीट से अपनी बेटी के लिए टिकट चाहते हैं.

कांग्रेस के सीनियर नेता सीके ज़फ्फर शरीफ एक बार फिर से अपने पोते रहमान शरीफ की राजनीति में एंट्री को लेकर कोशिश कर रहे हैं. वह चाहते हैं कि पार्टी हाईकमान उनके पोते को सेंट्रल बेंगलुरु के हिब्बल से टिकट दे. पिछले चुनाव में ज़फ्फर बीजेपी उम्मीदवार से यह सीट हार गए थे. इसके अलावा एक अन्य कांग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा अपने छोटे बेटे निवेदित अल्वा के लिए कांग्रेस हाईकमान से उत्तर कन्नड़ जिले की सिरसी सीट का टिकट चाहती हैं.


2008 के विधानसभा चुनाव में हार से नाराज अल्वा ने कुछ लोगों को मनचाहा टिकट देने और कुछ लोगों को मना कर देने को लेकर कांग्रेस हाईकमान को फटकार भी लगा चुकी हैं. इसके लिए पार्टी हाईकमान ने उन्हें ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के महासचिव पद से हटा भी दिया था.

अनुभवी दलित नेता और कोलार से सात बार कांग्रेस सांसद रह चुके केएच मुनियाप्पा भी अपनी बेटी के टिकट के लिए कोशिश में जुटे हैं. वहीं, विधानसभा अध्यक्ष केबी कोलीवाड़ ने अपने बेटे के लिए रास्ता बनाने को लेकर राजनीति से रिटायर होने का फैसला किया है. उधर, दिवंगत मुख्यमंत्री एन धरम सिंह के दामाद चंद्र सिंह बिदर साउथ से कांग्रेस का टिकट चाहते हैं. चंद्र सिंह निर्दलीय विधायक अशोक खेनी को कांग्रेस में शामिल करने से परेशान हैं. इसके अलावा दिवंगत और पूर्व केंद्रीय मंत्री बी. शंकरानंद के बेटे सिंधे भीमसेन राव भी बिदर जिले के औरड़ से चुनाव लड़ना चाहते हैं. वर्तमान विधानसभा में विधायक बाप-बेटे की दो जोड़ियां हैं. दोनों जोड़ियां कांग्रेस पार्टी से हैं.

मामले में अपवाद भी है
हालांकि, इसका एक अपवाद भी है. कांग्रेस पार्टी योजना मंत्री एमआर सीताराम के बेटे रक्षा राम को सीताराम की प्रतिष्ठित सीट मलेश्वरम से चुनावी मैदान में उतारना चाहती थी. लेकिन, रक्षा राम ने विनम्रता से इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है.

बीजेपी के सीएम कैंडिडेट बीएस येदियुरप्पा भी इस लिस्ट में शामिल हैं. येदियुरप्पा हवेरी जिले के राणेबेन्नूर विधानसभा सीट से अपने बेटे बीवाई राघवेंद्र को चुनावी मैदान में लाने की योजना बना रहे हैं. उनके दूसरे बेटे बीवाई विजेंदर को शुरू में बेंगलुरु शहर की एक सीट से चुनाव लड़ने में दिलचस्पी थी. लेकिन, नेगेटिव फीडबैक के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल लिया.
जेडीएस में, गौड़ा के पोते प्रजवल रेवन्ना अपने परिवार पर जोर दे रहे हैं कि वे पार्टी हाईकमान से उनके लिए बेंगलुरु शहर के आरआर नगर की सीट का टिकट दिलाएं. जेडीएस राज्य के प्रमुख एचडी कुमारस्वामी की पत्नी अनीता बेंगलुरु ग्रामीण में चिनपात्ना सीट पर भी नजर रख रही हैं, लेकिन सीनियर गौड़ा ने यह कहते हुए उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया कि सिर्फ उनके दोनों बेटों को छोड़कर परिवार के किसी सदस्य को इस बार पार्टी का टिकट नहीं लेने देंगे. हालांकि, परिवार के सदस्यों को अभी भी उम्मीद है कि आगे बात बन सकती है.


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