सोनिया ने कहा- BJP ने कांग्रेस पर मुस्लिम पार्टी होने का ठप्पा लगाया
सोनिया ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने कांग्रेस की छवि एक मुस्लिम पार्टी के तौर पर गढ़ी, जिससे पार्टी को चुनाव में नुकसान हुआ।


नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष को एकजुट करने की कोशिशों में जुटीं कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्ष और पार्टी संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने शुक्रवार को बीजेपी और मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। सोनिया ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने कांग्रेस की छवि एक मुस्लिम पार्टी के तौर पर गढ़ी, जिससे पार्टी को चुनाव में नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता और वह स्वयं मंदिर जाती रही हैं। पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने के बाद यह पहला मौका था जब उन्होंने एक गहरे आत्मविश्लेषी भाषण में अपने बच्चों, अपनी कमियों और भारत में लोकतंत्र की भूमिका सेमत कई विषयों पर बात की।

शुक्रवार को एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने साफ तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि लोकतंत्र में चर्चा और मतभेद दोनों स्वीकार्य हैं पर एकालाप नहीं। उन्होंने कहा कि 2019 में उनकी पार्टी सत्ता में वापसी करेगी और कांग्रेस का मुख्य मुद्दा मोदी सरकार द्वारा किए गए वादे होंगे। 

सोनिया ने पूछा, 'क्या भारत 26 मई 2014 से पहले पूरी तरह एक ब्लैक होल था? क्या भारत विकास और महानता की तरफ सिर्फ 4 साल पहले बढ़ा है? क्या यह कहना हमारे लोगों की बुद्धिमत्ता का अपमान नहीं है।' मंदिर जाने के सवाल पर सोनिया कहा कि बीजेपी ने कांग्रेस को मुस्लिमों की पार्टी बताया और वह ऐसा करने में सफल भी रही। उन्होंने कहा, 'हम मंदिर जाते रहे हैं। राजीव गांधी के साथ घूमने के दौरान मैं उस क्षेत्र के बड़े मंदिर में जरूर जाती थी। लेकिन हमने कभी इसका प्रचार नहीं किया।' बता दें कि सोनिया गांधी ने विपक्षी दलों को एकजुट करने के उद्देश्य से 13 मार्च को विपक्ष के नेताओं को डिनर के लिए बुलाया है। माना जा रहा है कि यह सिर्फ डिनर नहीं होगा बल्कि बीजेपी के शासन के खिलाफ विपक्ष की एकता को भी दर्शाएगा। 

'मुझे पता था मनमोहन मुझसे अच्छे पीएम साबित होंगे'
2004 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बादअपने नेतृत्व की भूमिका पर उन्होंने कहा कि वह जानती थीं कि मनमोहन सिंह उनसे अच्छे प्रधानमंत्री साबित होंगे औरसाथ ही वह अपनी सीमाओं के बारे में जानती थीं। सोनिया ने कहा, 'मुझे स्वाभाविक तौर पर भाषण देना नहीं आता, इसलिए मुझे नेता (लीडर) के बजाए भाषण पढ़ने वाला (रीडर) कहा जाता था।' 

अलग दौर से गुजर रही है राजनीति 
सोनिया गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में बहस की खुली छूट होनी चाहिए। आज के दौर में काफी लोग पीछे छूट रहे हैं। इतिहास को दोबारा लिखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस समय देश की राजनीति एक अलग दौर से गुजर रही है। संविधान के सिद्धांतों पर प्रहार हो रहा है। सत्ता में बैठे लोग भड़काऊ बयान दे रहे हैं। इससे अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा बढ़ रहा है। देश में भर में विरोध में उठ रही आवाजों को दबाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा, 'चुनाव के लिए लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है। यहां तक कि हमारे सोशल डीएनए में भी बदलाव का प्रयास किया जा रहा है। आरटीआई कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है।' उन्होंने कहा कि देश में रोजगार की समस्या गंभीर है, किसानों की परेशानी बढ़ रही है। इन आवाजों को उठाने वाले राजनीतिक दलों को जांच एजेंसियों के जरिए दबाने की कोशिश हो रही है। सोनिया गांधी ने नोटबंदी को देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका बताया। संसदीय बहुमत को कुछ भी करने का लाइसेंस माना जा रहा है। 

मोदी के बारे में सवाल पर 'सीता' से दिया जवाब 
इस दौरान जब सोनिया गांधी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, 'मैंने पूरी रामायण पढ़ दी है और अब आप पूछ रहे हैं कि सीता कौन थीं?' उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री से कार्यक्रमों में मिलती रहती हैं, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं जानती हैं। 

2019 में करेंगे वापसी 
कार्यकम में सोनिया गांधी ने कहा कि बीजेपी 4 साल में किए गए एक भी वादे को पूरा नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा, '2019 में मुख्य मुद्दा बीजेपी द्वारा बीते 5 साल के दौरान किए गए वादे होंगे क्योंकि पूरा कार्यकाल खत्म होने के बाद भी उनके सारे वादे सिर्फ सुनहरे वादे ही रह गए। मुझे पूरा भरोसा है कि बीजेपी के अच्छे दिन का हाल एक बार फिर 'शाइनिंग इंडिया' जैसा होने जा रहा है। हम 2019 में वापसी करेंगे।' 

वाजपेयी की तारीफ 
सोनिया गांधी ने सत्ता पक्ष पर आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष को बोलने भी नहीं दिया जाता है। सोनिया ने कहा, 'हम कई मुद्दों पर बहस भी नहीं कर पाते हैं। सरकार न जाने क्यों चर्चा से भागती है।' इस दौरान उन्होंने कहा कि विचारों मामले पर भले ही उनकी पार्टी वाजपेयी से सहमत न हो, लेकिन वाजपेयी सरकार में संसदीय परंपराओं के लिए काफी सम्मान था। इस मामले में मोदी सरकार पीछे छूट गई है। 

राहुल के सवाल पर यह दिया जवाब 
सोनिया गांधी ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने के बाद अब उनके पास अधिक समय है। वह कई मायनों में चिंतामुक्त हुई हैं। लिहाजा इस समय में वह राजीव गांधी से जुड़े पुराने दस्तावेजों को पढ़ने और परिवार की जिम्मेदारी निभाने में लगी हैं। राहुल गांधी के बारे में पूछे जाने पर सोनिया गांधी ने कहा, 'राहुल अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। जैसे हर व्यक्ति का काम करने का अपना अलग तरीका होता है, वैसे ही राहुल भी अपने ढंग से काम कर रहे हैं। यदि किसी विषय पर राहुल मुझसे चर्चा करते हैं तो मैं उन्हें सलाह देती हूं। वह नए लोगों को आगे लाना चाहते हैं।' 

2014 में इसलिए हारी कांग्रेस 
जब सोनिया गांधी से 2014 में उनकी पार्टी की हार के कारणों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'देश में हमारी सरकार 10 साल तक थी। हम दो टर्म तक सरकार में थे। ऐसे में हमें सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा। साथ ही बीजेपी अपना प्रॉपेगैंडा फैलाने में कामयाब रही। यूपीए सरकार को बदनाम किया गया। कई घोटालों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया। सीएजी की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है। अब हमारे सामने कई चुनौतियां हैं। पार्टी को इससे बाहर निकलने का रास्ता ढूंढना होगा।' 

जब उनसे पूछा गया कि क्या पार्टी का पद छोड़ने के साथ उनका राजनीतिक सफर खत्म माना जाए? तो सोनिया ने कहा कि वह राहुल के साथ पार्टी के मामलों पर लगातार बातचीत करती रहती हैं। उनकी कोशिश है कि वह देश में एक सेक्युलर फ्रंट को तैयार करने में भूमिका अदा करें, जिससे देश की राजनीति को अच्छी दिशा मिलती रहे। 


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