समाजवाद पर टिपण्णी – सीएम योगी को तत्काल पदमुक्त करें राज्यपाल : सपा
Akhilesh Yadav


लखनऊ, कोई कितने भी बड़े पद पर क्यों न हो पर उसका इसका आचरण अथवा अभिव्यक्ति संवैधानिक मर्यादा के अंतर्गत होनी चाहिए. ये कहना है समाजवादी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का . इस आशय की जानकारी सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी ने दी. 

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समाजवाद पर की गयी टिपण्णी पर गहरा असंतोष जताते हुए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  जिस तरह ‘समाजवाद‘ पर टिप्पणी की है वह सरासर असंवैधानिक कृत्य है। समाजवाद सामाजिक-आर्थिक समानता के सिद्धांत से प्रतिबद्ध है। जो सामाजिक गैरबराबरी और आर्थिक विषमता के पोशक हैं, वही समाजवाद पर प्रहार कर रहे हैं।  

योगी के नेत्रत्व वाली भाजपा सरकार पर हलवार होते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार से जिस नैतिक आचरण और संवैधानिक जिम्मेदारी की अपेक्षा है उसका सर्वथा अभाव दिखाई देता है। संविधान की पवित्रता को बचाने के लिए संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा पद के दुरूपयोग के विरूद्ध तत्काल कार्यवाही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अनैतिक और संविधान के प्रति अवमाननापूर्ण आचरण को तत्काल संज्ञान में लेते हुए महामहिम राज्यपाल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पदमुक्त करना चाहिए क्योंकि यह एक गंभीर मामला है। 

सपा मुखिया ने कहा कि बीजेपी गोरखपुर और फूलपुर (इलाहाबाद) के लोकसभा उपचुनावों में सपा से मिली करारी हार को पचा नहीं पा रही है इसलिए बीजेपी में कुछ ज्यादा ही बौखलाहट नजर आ रही है. अखिलेश ने कहा कि बीजेपी समाजवाद की आड़ में सीधा-सीधा संविधान पर हमला बोल रही है भाजपा का यह आचरण लोकतांत्रिक नहीं है।
उन्होंजे कहा कि  वस्तुतः समाजवाद पर लोगों की उम्मीद है क्योंकि उसमें वंचित, दलित और कमजोर वर्ग की आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति है। समाजवाद में किसान, नौजवान, अल्पसंख्यक और गरीबों, को वरीयता है। समाजवाद श्रम का सम्मान करता है जबकि समाजवाद विरोधी पूंजीघरानों की स्वार्थपूर्ति की राजनीति को बढ़ावा देते हैं।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र समता की आकांक्षा पैदा करता है। देश की सामाजिक-धार्मिक विविधता को भय और आतंक के जरिए दुष्प्रभावित करने वाली ताकते ही धर्मनिरपेक्षता पर आघात करती हैं। जब अपने से असहमत विचारों के प्रति असहिष्णुता जोर पकड़ती है तो न केवल भारत के लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा होता है बल्कि उसकी एकता में भी दरार पड़ती है।

भाजपा भारत रत्न और संविधान निर्माता डा0 भीमराव आम्बेडकर का अपमान भी कर रही है। स्पष्ट है कि भाजपाई गरीबों, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के विरोध में है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने ठीक ही कहा है कि डा0 आंबेडकर को बच्चा-बच्चा जानता है। लिहाजा वे नए परिचय के मोहताज नहीं है। योगी जी को संविधान पढ़ना चाहिए और महापुरूषों के साथ सियासत नहीं करनी चाहिए।

सपा के राष्ट्रीय सचिव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार जिस तरह संविधान को ही चुनौती दे रही है, वह एक गंभीर स्थिति है। यहां कानून का राज नहीं रह गया है। दूसरों पर गुंडाराज का आरोप लगाना आसान है। अपनी भी सरकार के कारनामों को याद करना चाहिए। यदि भाजपा राज में अपराधी भयभीत हैं तो यूपीकोका की क्या जरूरत थी? मुख्यमंत्री जी की हठधर्मिता से संवैधानिक व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं। इस पर राजभवन की चुप्पी क्यों? 


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