अमेरिका-चीन की इस 'जंग' में नहीं उलझेगा भारत, इस तरह उठाएगा लाभ
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नई दिल्ली, भारत ने चीन के साथ यहां स्ट्रैटिजिक इकनॉमिक डायलॉग (SED) के बाद कहा कि वह अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर में किसी का भी पक्ष नहीं लेगा. इस वार्ता के दौरान चीन की विवादास्पद 'वन बेल्ट-वन रोड' को लेकर भी दोनों पड़ोसियों में मदभेद बना रहा. बैठक में भारतीय दल का नेतृत्व नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने किया.

बैठक में चीन के दल की अगुवाई नैशनल डिवेलपमेंट ऐंड रिफॉर्म कमिशन के चेयरमैन ही लिफेंग ने किया. वार्ता के पांचवें दौर की समाप्ति पर के बाद कुमार ने कहा कि भारत नियम आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था का समर्थन करता है. इस लिहाज से हमें इधर-उधर किसी का पक्ष लेने की जरूरत नहीं है.

कुमार ने भारतीय मीडिया से कहा कि भारत ने व्यापार के मुद्दे पर हमेशा स्वतंत्र रुख लिया है. गौरतलब है कि इस समय अमेरिका और चीन ट्रेड वॉर में उलझे हैं. अमेरिका राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप चीन पर 375 अरब डॉलर के व्यापार घाटे को दूर करने के लिए चीन पर दबाव बढ़ा रहे हैं. अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है.

क्या है ट्रेड वॉर
ट्रेड वॉर या व्यापार की लड़ाई संरक्षणवाद का नतीजा है. अगर कोई देश किसी देश के साथ ट्रेड पर टैरिफ या ड्यूटी बढ़ाता है और दूसरा देश इसके जवाब में ऐसा ही करता है तो समझिए ट्रेड वॉर की स्थिति बन चुकी है. दो देशों से शुरू ऐसी ट्रेड वॉर धीरे-धीरे विश्व के कई देशों के बीच व्यापारिक टेंशन का माहौल बना सकती है. अपने देश के उद्योग बचाने के लिए अधिकतर देश ऐसे टैरिफ लगाते हैं, जिसे संरक्षणवाद कहा जाता है.


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