लोकसभा में मेरे सामने 15 मिनट भी नहीं टिक पाएंगे मोदी: राहुल गांधी
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अमेठी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को अमेठी में कहा कि प्रधानमंत्री ने देश की जनता को लाइन में लगाया. आपकी जेब से 500 और 1000 का नोट छीनकर नीरव मोदी की जेब में डाला. प्रधानमंत्री एक शब्द नहीं बोलते हैं. प्रधानमंत्री पार्लियामेंट में खड़े होने से डरते हैं. अगर हमें 15 मिनट का भाषण का समय मिल जाए तो प्रधानमंत्री सामने खड़े नहीं हो पाएंगे. चाहे वह राफेल का मामला हो या नीरव मोदी का, वो खड़े नहीं हो पाएंगे. पूरे देश का चक्कर घूम-घूम कर काट रहे हैं.

राहुल गांधी ने कहा कि राफेल में सीधे चोरी की है. 45 हजार करोड़ रुपए एक उद्योगपति मित्र को दिया है. एचएएल से छीना, बैंगलोर में रोजगार छीना. उन्होंने कहा कि पीएम नीरव मोदी को नाम से पहचानते हैं. उसको नीरव कहते हैं. मेहुल चौकसी को मेहुल भाई कहते हैं. ये सच्चाई है. राहुल गांधी ने पूछा कि किसके अच्छे दिन आये? मोदी जी ने कहा था जनता के अच्छे दिन आएंगे. सच्चाई क्या है? सिर्फ 15 लोगों के अच्छे दिन आये. गरीब किसान मजदूर के बुरे दिन आ गए.

इससे पहले दो दिवसीय अमेठी दौरे पर पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार को स्कूली छात्रों के सवाल पर असहज नजर आए. स्कूल के एक कार्यक्रम में पहुंचे राहुल गांधी से जब छात्रों ने कुछ सवाल किए तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब आप मोदी और योगी जी से पूछिए. देश और प्रदेश तो वही चला रहे हैं.

दरअसल, सोमवार को राहुल गांधी ने एक स्कूल के कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित किया. इसके बाद उन्होंने छात्रों के एक समूह से बातचीत भी की. इस दौरान छात्र-छात्राओं ने अमेठी के सांसद से एक के बाद एक कई सवाल पूछे. छात्रों के सवाल पर राहुल गांधी बैकफुट पर नजर आए. उन्होंने हर सवाल के जवाब में कहा आप मोदी और योगी जी से पूछिए.

राहुल से एक लड़की ने पूछा कि देश में जो कानून बनते हैं उन्हें ग्रामीण इलाकों में सही से लागू क्यों नहीं किया जाता? इसके जवाब में राहुल ने तुरंत कहा, "यह सवाल तो आप मोदीजी से पूछिए. सरकार मोदीजी चला रहे हैं. मेरी सरकार थोड़ी ही है. जब हमारी सरकार होगी तो हम जवाब देंगे."

इस पर छात्रा ने कहा कि अमेठी को लेकर ही कुछ बोलिए, यहां पर बिजली-पानी जैसी सुविधाएं क्यों नहीं हैं? इस पर राहुल ने जवाब दिया कि अमेठी को तो योगीजी चला रहे हैं. मेरा काम लोकसभा में कानून बनाने का है, अमेठी तो उन्हें चलाना है. न ही वह बिजली दे रहे हैं, न पानी दे रहे हैं. यह सब काम उन्हें करने चाहिए, लेकिन वह तो कुछ और कर रहे हैं. बिजली, पानी, शिक्षा का काम नहीं कर रहे हैं और क्रोध फैला रहे हैं.”

हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि राहुल गांधी ने गम्भीर होकर ऐसे जवाब दिए या सिर्फ मजाक में. क्योंकि एक सांसद होने के नाते उनकी जिम्मेदारी संसदीय क्षेत्र के विकास की भी है. बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए ही उन्हें सांसद निधि में हर साल पांच करोड़ रुपये खर्च करने के लिए मिलते हैं. लिहाजा वे अपनी जिम्मेदारी से भी नहीं भाग सकते.


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