नरोदा पाटिया दंगा: 2002 नरसंहार मामले में गुजरात हाईकोर्ट में फैसला आज
नरोदा पाटिया दंगा: 2002 नरसंहार मामले में गुजरात हाईकोर्ट में फैसला आज
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अहमदाबाद , गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में साल 2002 में हुए नरोदा पाटिया नरसंहार में हाईकोर्ट शुक्रवार को फैसला सुना सकता है. गुजरात दंगे के बाद नरोदा पाटिया में 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी. जबकि 33 लोग घायल हुए थे. इस केस में हाईकोर्ट के दो जजों की बेंच ने पिछले साल अगस्त में फैसला सुरक्षित रख लिया था.

दरअसल, इस केस में एसआईटी स्पेशल कोर्ट ने बीजेपी विधायक माया कोडनानी और बाबू बजरंगी समेत 32 को दोषी ठहराया था. इनमें से कोडनानी को 28 साल की कैद और बाबू बजरंगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. बाकी सात दोषियों को 21 साल की जेल और अन्य को 14 साल की सजा सुनाई गई थी. वहीं, सबूतों के अभाव में 29 अन्य आरोपी बरी हो गए थे.

निचली अदालत में दोषी करार दिए जाने के बाद दोषियों ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. वहीं, स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) ने 29 लोगों को बरी किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इस केस में हाईकोर्ट के जस्टिस हर्षा देवानी और जस्टिस ए एस सुपेहिया की बेंच ने मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद पिछले साल अगस्त में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था.

क्या है नरोदा पाटिया केस?

गुजरात में साल 2002 में हुए दंगों के दौरान अहमदाबाद में स्थित नरोदा पाटिया इलाके में 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी. ये नरसंहार 28 फरवरी 2002 को हुआ था. इस दंगे में 33 लोग घायल भी हुए थे.

क्यों हुई थी हत्या?
यह घटना 27 फरवरी, 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन जलाए जाने के एक दिन बाद हुई थी. विश्व हिंदू परिषद ने 28 फरवरी, 2002 को बंद का आह्वान किया था. इसी दौरान नरोदा पटिया इलाके में उग्र भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया था.

कब शुरू हुआ मुकदमा?
नरोदा पाटिया कांड का मुकदमा अगस्त 2009 में शुरू हुआ और 62 आरोपियों के खिलाफ आरोप दर्ज किए गए थे. सुनवाई के दौरान एक अभियुक्त विजय शेट्टी की मौत हो गई.

अदालत ने सुनवाई के दौरान 327 लोगों के बयान दर्ज किए. इनमें पत्रकार, कई पीड़ित, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी और सरकारी अधिकारी शामिल थे.

कौन हैं माया कोडनानी?
माया कोडनानी दंगा के समय नरोदा से विधायक थीं. 2002 के गुजरात दंगों में उनका नाम सामने आया. 2002 में ही हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में वे फिर से विधायक चुनी गईं. 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भी माया कोडनानी की जीत हुई. इसके बाद वह गुजरात सरकार में मंत्री बन गईं. नरोदा पाटिया दंगा मामले में माया कोडनानी पर आरोप था कि माया ने दंगाई भीड़ का नेतृत्व किया था.

बता दें कि माया का परिवार बंटवारे से पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रहता था, लेकिन बाद में परिवार गुजरात आकर बस गया. माया कोडनानी पेशे से गाइनकालजिस्ट हैं. हालांकि माया डॉक्टर के तौर पर ही कम और आरएसएस की कार्यकर्ता के तौर पर ज्‍यादा जानी जाती थीं.


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