कर्नाटक के रण में कूदीं सोनिया, कहा- मोदी जी भाषण अच्छा देते हैं, लेकिन उससे पेट नहीं भरता
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नई दिल्ली, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दो साल के अंतराल के बाद मंगलवार को कर्नाटक के विजयपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित किया. यहां उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर कांग्रेस शासित कर्नाटक के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए उनके 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे पर सवाल उठाए.

सोनिया गांधी ने कहा कि विजयपुर और कर्नाटक की तरक्की के लिए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खूब काम किया है. कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार ने कर्नाटक को नंबर वन बनाया. सिद्धारमैया सरकार ने गरीबों को सस्ता खाना उपलब्ध कराने के लिए इंदिरा कैंटीन शुरू किया, क्योंकि सस्ता और पोष्टिक खाना उनका हक है. उन्होंने कहा कि बीजेपी और मोदी ने हमारे द्वारा शुरू किए गए मनरेगा कार्यक्रम का मजाक उड़ाया.

सोनिया बोलीं- बीजेपी और मोदी ने हमारे द्वारा शुरू किए गए मनरेगा कार्यक्रम का मजाक उड़ाया. कर्नाटक में सूखा पड़ा तो सीएम सिद्धारमैया ने पीएम से मिलने का वक्त मांगा, लेकिन उन्हें वक्त नहीं दिया गया. उन्होंने कहा, 'मोदी सरकार कर्नाटक में हमारी सरकार के साथ भेदभाव कर रही है. क्या यही आपका 'सबका साथ, सबका विकास' है?'

यूपीए अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी पर प्रहार करते हुए कहा- मोदी जी अच्छा भाषण देते हैं, एक अभिनेता की तरह भाषण देते हैं. लेकिन केवल भाषण से लोगों का पेट नहीं भर सकता, लोगों का कल्याण नहीं हो सकता है.

उन्होंने कहा कि मोदी जहां जाते हैं झूठ ही बोलते हैं, इतिहास के साथ छेड़छाड़ करते हैं. वह अपना राजनीतिक मकसद साधने के लिए इतिहासिक हस्तियों का दुरुपयोग करते हैं. कभी आपने पहले ऐसा पीएम देखा जो केवल बात ही करता हो, काम नहीं.

यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि मोदी जी पर कांग्रेस मुक्त भारत का जुनून है. उन्हें इसका भूत लगा है. कांग्रेस मुक्त भारत तो छोड़िए, वह अपने सामने किसी को बर्दाश्त नहीं कर सकते.

सोनिया ने भ्रष्टाचार को लेकर लगातार सिद्धरमैया सरकार पर हमला कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पलटवार करते हुए कहा कि वह जानना चाहती हैं कि भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था लोकपाल का क्या हुआ जिसके गठन का प्रस्ताव था. 

सोनिया गांधी ने सवाल किया कि भ्रष्टाचार हटाने के पीएम के वादे का क्या हुआ? सरकार आने के 4 साल बाद भी केंद्र में लोकपाल की नियुक्ति क्यों नहीं हुई?


बता दें कि लोकपाल विधेयक को जनवरी, 2014 में राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई थी, जिससे भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था के गठन का रास्ता साफ हो गया था. लोकपाल के दायरे में कुछ सुरक्षा मानकों के साथ प्रधानमंत्री भी आएंगे, हालांकि अब तक लोकपाल का गठन नहीं हुआ है.


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