अपनी जाबांजी के लिए जाने जाते थे राजेश साहनी, कई टेरर केसों का किया था खुलासा
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दिवंगत यूपी एटीएस के अपर पुलिस अधीक्षक राजेश शाहनी की छवि विभाग में एक जांबाज पुलिस अधिकारी के रूप में थी. स्वभाव से सरल और शांत रहने वाले राजेश साहनी ने कई टेरर मोड्यूल का खुलासा किया था. वे सभी ऑपरेशन को खुद ही लीड करते थे.

राजेश काफी समय से तमाम आतंकी संगठनों के स्लीपर मॉड्यूल और भारत में आतंक की साजिशों को बेनकाब कर रहे थे. एनआईए में दो साल रहने के बाद 2014 में उन्होंने लखनऊ में यूपी एटीएस की जिम्मेदारी दी गई. इस दौरान भी उन्होंने कई आतंकी साजिशों को बेनकाब किया.

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खुदकुशी से एक हफ्ते पहले मई 2018 में इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के घर दो साल रहकर आईएसआई के लिए जासूसी करने वाले रमेश सिंह को पिथौरागढ़ से गिरफ्तार किया.

7 मार्च 2017 को लखनऊ के काकोरी इलाके के हाजी कॉलोनी में आईएसआईएस के खुरासान मोड्यूल का खुलासा करते हुए आतंकी सैफुल्लाह को मार गिराया था. इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन को फ्रंट से लीड किया और बिना बुलेट प्रूफ जैकेट के सबसे आगे डंटे रहे.

मई 2017 में फ़ैजाबाद से आईएसआई एजेंट अफताब को पकड़ा. आफताब की गिरफ्तारी से कई स्लीपिंग मोड्यूल का खुलासा हुआ.

अगस्त 2017 में बब्बर खालसा आतंकी संगठन से जुड़े जसवंत सिंह काला को उन्नाव के एक फार्म हाउस से गिरफ्तार किया.

इसके बाद सितम्बर 2017 में कई बांगलादेशी घुसपैठियों को पकड़ा. इनका संबंध आतंकी संगठन अंसारउल्ला बांग्ला से था.

वर्ष 2013 में एनआईए में तैनाती के दौरान असलहा तस्कर गैंग की कमर तोड़ने में अहम भूमिका निभाई. जिसके बाद नक्सालियों को होने वाली सप्लाई बाधित हो गई.


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