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राष्ट्रगान बजते वक्त भावुक हुईं हिमा दास, PM मोदी ने ट्वीट कर कहा- सभी देखें यह पल
हिमा दास


नयी दिल्ली, विश्व चैंपियनशिप में किसी भी ट्रैक पर देश का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर असम की 18 वर्षीय हिमा दास ने गुरुवार को इतिहास बनाया. नौगांव जिले के धिंग गांव के एक किसान की बेटी हिमा दास ने आईएएएफ वर्ल्ड अंडर -20 एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में जीत हासिल की.

हिमा दास ने गुरुवार को महिला 400 मीटर फाइनल में खिताब के साथ आईएएएफ विश्व अंडर 20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी. खिताब की प्रबल दावेदार 18 साल की हिमा दास ने 51.46 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता.

वह भाला फेंक के स्टार खिलाड़ी नीरज चोपड़ा की सूची में शामिल हो गई, जिन्होंने 2016 में पिछली प्रतियोगिता में विश्व रिकॉर्ड प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीता था. वह हालांकि इस प्रतियोगिता के इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली ट्रैक खिलाड़ी हैं.

इन सबके बीच हिमा का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें जब उनको स्वर्ण पदक दिए जाने के बाद राष्ट्रधुन बजाई गई तो हिमा के आंख से आंसू बह रहे थे. इस पर तमाम लोगों ने ट्वीट किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर लिखा है, हिमा दास की जीत में ना भुलाए जाने वाले लमहे. जीतने के तुरंत बाद उसे तिरंगा ढूंढ़ते हुए देखा और राष्ट्रगान गाते समय उनका भावुक हो जाने ने मुझ पर गहरा असर किया.'



वहीं केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने भी इसी वीडियो का जिक्र कर अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, 'एक किसान की बेटी बनी भारत की नई "उड़नपरी"! किसी भी विश्व एथेलेटिक्स स्पर्धा में भारतीय राष्ट्रगान बजने और हाथों में तिरंगे लिए भारतीय धावक को देखने का सपना भारत की एक बेटी ने पूरा किया. हिमा दास ने आज अपनी स्वर्णिम सफलता के जरिये ना सिर्फ इतिहास रचा बल्कि हर देशवासी का सर गर्व से ऊँचा कर दिया है. आनंद लीजिये उन पलों का जब पहली पहली बार अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स स्पर्धा में राष्ट्रगान की धुन बजी.'

फिनलैंड से बात करते हुए हिमा ने कहा,'मैं भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने से बहुत खुश हूं. मैं अपने कोच और मेरे माता-पिता को धन्यवाद देना चाहती हूं. मेरी जीत के पीछे उनकी शक्ति है.'

जब पूछा गया कि 400 मीटर फाइनल के लिए दौड़ने से पहले उसके दिमाग में क्या चल रहा था, तो उसने कहा, 'कुछ भी नहीं . अगर मुझे बहुत ज्यादा सोचना पड़ता तो मैं अपने दौड़ने पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाती. मैं खुद को कह रही थी भाग, हिमा, भाग ... और मैं सिर्फ भागी.'


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