अमित शाह के 'बहुसंख्यक' अपील के खिलाफ ममता ने भरा 'बंगाली' का दम
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संखदीप दास

ममता बनर्जी ने एक बार फिर से एनआरसी मुद्दे पर बीजेपी पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया है कि बीजेपी 12 लाख बंगालियों को असम से बाहर निकालना चाहती है. दरअसल, इसी महीने के शुरुआत में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कोलकाता में एक रैली की थी. 28 मिनट की इस रैली में 15 मिनट तक उन्होंने असम के मुद्दे पर बोला. अमित शाह ने कहा कि बीजेपी बंगालियों के खिलाफ नहीं है बल्कि घुसपैठ और ममता के खिलाफ है.

शारदा, नारदा और रोज़ वैली की जांच अब कहीं ठंडे बस्ते में जाती हुई दिख रही है. जैसे-जैसे 2019 का चुनाव पास आ रहा है वैसे-वैसे अमित शाह ने अपना ध्यान बंगाल में ध्रुवीकरण की राजनीति की ओर केंद्रित कर लिया है. इस कैंपेन का क्या कहा जा रहा है? बांग्लादेशियों का घुसपैठ रोको, सरस्वती पूजा और दुर्गा पूजा करो. अगर ममता सरकार मूर्ति विसर्जन को लेकर कोई रोक लगाती है तो हम उसका मुकाबला करेंगे.

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ममता बनर्जी का चुनाव को लेकर एजेंडा तय है. उनकी रणनीति है कि अल्पसंख्यक वोटों को पूरा का पूरा अपना बना के रखा जाए और इसमें बंगाली राष्ट्रवाद के माध्यम से बाकी वोटों को जोड़ दिया जाए. इसलिए पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'बंगला' रखने का प्रस्ताव भी इसी योजना के तहत था. अगर केंद्र सरकार ने मना किया होता तो ये ममता बनर्जी के पक्ष में चला जाता लेकिन गृह मंत्रालय ने संकेत दिया कि वो इस प्रस्ताव को पारित कर देगा.

इसके अलावा ममता बनर्जी बंगाल की जनता में इस बात को फैलाने में लगी हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद वो प्रधानमंत्री बन सकती हैं. उनका कहना है कि आम चुनावों के बाद तृणमूल तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर सकती है. इसलिए अगर किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तो ऐसी स्थिति में उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी. टीएमसी लोगों की भावनाओं को ये कहकर भी भुनाना चाह रही है कि अगर ऐसा होता है पहली बार कोई बंगाली प्रधानमंत्री देश को मिलेगा.

अब एनआरसी के मुद्दे को लेकर ममता बनर्जी लगातार ये बताने की कोशिश कर रही हैं कि बीजेपी असम से बंगालियों को बाहर करना चाह रही है. लेकिन इन सबके पीछे मकसद बंगाली राष्ट्रवाद की भावना को भुनाना ही है.

इसीलिए कोलकाता में दिए अपने हालिया भाषण में अमित शाह को कहना पड़ा कि वो बंगालियों के खिलाफ नहीं है. उन्होंने ये भी कहा कि हिंदू शरणार्थियों को एनआरसी को लेकर डरने की ज़रूरत नहीं है. इसके बजाय मौजूदा मोदी सरकार सिटीज़नशिप बिल लाने की तैयारी में है ताकि उन्हें नागरिकता दी जा सके.

अपनी बात पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बंगाल है और 19 राज्यों में बीजेपी सरकार होने का कोई मतलब नहीं है अगर बीजेपी ममता सरकार को बंगाल से उखाड़ नहीं फेंकती.

अमित शाह ने ममता के ऊपर आरोप लगाया कि ममता सरकार अवैध बंगाली घुसपैठ के खिलाफ बोलकर मुसलमानों का तुष्टीकरण कर रही हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि ये बांग्लादेशी घुसपैठिये कई आतंकवादी एक्टिविटीज़ में शामिल है. बार-बार अमित शाह ने अपने भाषण में श्री चैतन्य और रामकृष्ण का ज़िक्र किया.

आम चुनावों में अब आठ महीने ही बचे हैं लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं है कि आने वाले दिनों में इस तरह से किया जाने वाला ध्रुवीकरण और ज़्यादा मजबूती से उभरेगा. ये लड़ाई 'अमी बंगाल' बनाम 'बहुसंख्यक' होने वाली है.

लेकिन सवाल यह है कि क्या कांग्रेस और लेफ्ट इस ध्रुवीकरण की राजनीति के सामने टिक पाएगी. देखा जाए तो वास्तविक सेक्युलर राजनीति के लिए जगह पूरी तरह से खाली है. पूरी तरह से खाली.


(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. विचार उनके निजी हैं)


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