जब गांधीजी की कड़ी चिट्ठी से बहुत आहत हुए थे जयप्रकाश नारायण
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लोकनायक जयप्रकाश नारायण महान नेता थे. 70 के दशक में हुई संपूर्ण क्रांति के नायक. विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में उनके अभिन्न सहयोगी. सादगी और गरिमा से युक्त जीवन जीने वाले. राजनीति में संत. वो जब विदेश में पढ़ने गए तो उनकी पत्नी गांधीजी के साथ आश्रम में काम करने चली गईं. वहां गांधीजी ने जेपी की पत्नी को आजीवन ब्रह्मचर्य का प्रण करवा दिया. जेपी ने जब ये बात जानकर खिन्नता जाहिर की तो गांधीजी ने उन्हें बहुत कड़ा पत्र लिखा. इस पत्र ने जयप्रकाश को बहुत आहत कर दिया.

जेपी की शादी 1920 में प्रभादेवी के साथ हुई. उस समय वह 18 साल के थे और प्रभावती 14 की. शादी के दो साल बाद ही वह शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए. वहां उन्होंने कैलिफोर्निया विश्व विद्यालय और विस्कासिन यूनिवर्सिटी में पढाई की. समाजशास्त्र से एमए किया.

1929 में जब वापस भारत लौटे तो असहयोग आंदोलन चरम पर था. जवाहर लाल नेहरू के कहने पर वह न केवल आजादी की लडाई में कूद पड़े बल्कि कांग्रेस के सदस्य भी बने. फिर गांधी के प्रियपात्रों में शामिल हो गए.

जीवन का अहम मोड़
असल में जयप्रकाश के जीवन में अहम मोड़ की शुरुआत भी उनके विदेश जाने के साथ ही हो गई. वह पढाई के लिए अमेरिका गए. पति के अमेरिका जाने के बाद प्रभावती देवी गांधी जी के आश्रम में चली गईं. वहीं गांधीजी का हाथ बंटाने लगीं

उसी दौरान उन्होंने गांधीजी के कहने पर ब्रह्मचर्य का पालन करने की शपथ ली. जेपी जब अमेरिका से लौटे तो उन्हें पत्नी का ये प्रण बहुत अच्छा नहीं लगा. क्योंकि इसका असर दांपत्य पर भी पड़ा. रिश्तों में खालीपन आ गया. पत्नी के ब्रह्मचर्य पर जयप्रकाश ने खिन्नता का इजहार किया.

तब गांधी ने लिखी कड़ी चिट्ठी
वरिष्ठ पत्रकार अरुण त्रिपाठी बताते हैं कि जब ये बात गांधीजी को पता लगी तो उन्होंने जेपी को कड़ी चिट्ठी लिखी. जेपी बहुत आहत हुए. ये चिट्ठी गांधीजी ने प्रभावती की जानकारी के बगैर लिखी थी. लिहाजा जब प्रभावती को इसका पता लगा तो गांधीजी के पास गईं और कहा, जयप्रकाश को उनके पत्र से कितनी ठेस पहुंची है.

तब गांधी ने एक और चिट्ठी लिखी
उन्होंने अपनी पति की संवेदनशीलता का जिक्र किया. गांधीजी शायद जेपी को एक और कड़ी चिट्ठी लिखना चाहते थे लेकिन प्रभाजी के बताने के बाद उन्होंने जयप्रकाश को चिट्ठी तो लिखी लेकिन कुछ इस तरह से कि वह जयप्रकाश की खिन्नता को दूर कर सकें.

उन्हें पत्र में प्रभावती के उच्च लक्ष्यों के बारे में लिखा. जीवन में ब्रह्मचर्य के उद्देश्यों की विवेचना की. पत्र ने जादू सा काम किया. जयप्रकाश को लगा, वाकई उनकी पत्नी देश के लिए कितना बड़ा बलिदान दे रही हैं.
ये बात भी सही थी कि असहयोग आंदोलन की अगुवाई जो तीन महिलाएं कर रही थीं, उनमें कस्तूरबा गांधी और कमला नेहरू के साथ प्रभावती भी थीं.

जेपी और विजया पटवर्धन करीब आए
ये भी सच है कि उनके जीवन में पत्नी प्रभावती देवी के अलावा एक अन्य महिला भी थीं, जिससे उन्हें तब प्यार हुआ, जब दोनों आजादी की लड़ाई में हिस्सा ले रहे थे. ये रिश्ता गरिमा, अपनत्व और समझबूझ के साथ ताजिंदगी बना रहा.

इस तरह आए विजया के करीब
1932 में गांधी, नेहरु और अन्य महत्त्वपूर्ण कांग्रेसी नेताओं के जेल जाने के बाद जेपी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में संग्राम का नेतृत्व किया. मद्रास में सितंबर 1932 में उन्हें गिरफ्तार करके नासिक के जेल में भेज दिया गया. यहीं उनकी मुलाकात अच्युत पटवर्द्धन से हुई. जिसकी वजह से वह उनकी बहन विजया पटवर्धन के करीब आए.

अंतरंग और अटूट रिश्ता
विजया युवा और उत्साही स्वतंत्रता सेनानी थीं. दुर्गावाहिनी की जोशीली कार्यकर्ता थीं. 1942 में जब जयप्रकाश जी आर्थर जेल से फरार होकर लोहिया जी के साथ नेपाल पहुंचे. वहां जाकर आजाद दस्ते का गठन किया तो इस काम में विजया ने उनकी भरपूर मदद की. वह उनके साथ जगह-जगह जाती थीं. दोनों इन हालात में करीब आते गए. उनमें अंतरंग और अटूट रिश्ता पनपा. ये ऐसे गंभीर संबंध में बदला जो जयप्रकाश के निधन तक बरकरार रहा.

जेपी का आकर्षक व्यक्तित्व
विजया उस समय नेपाल सीमा पर गिरफ्तार भी की गईं, जब वह जेपी को नेपाल कुछ सहायता देने जा रही थीं. उन्हें जेल में रखा गया. जब वह जेल से छूटीं तो जेपी के साथ मिलकर दूने जोश से उनका साथ देने लगीं. जेपी लंबे और आकर्षक व्यक्तित्व के बुद्धिमान और संवेदनशील व्यक्ति थे.
कोई भी महिला आसानी से उनके व्यक्तित्व के मोहपाश में बंध सकती थी. हालांकि जेपी उन लोगों में भी थे, जिन्होंने हमेशा महिलाओं से एक गरिमापूर्ण दूरी बनाई. अगर विजया उनकी ओर आकर्षित हुईं तो जेपी भी उनकी प्रखरता, सादगी, जोश से उनसे बंधते चले गए. दोनों प्यार के उस बंधन में बंधे जो आमतौर पर कम नजर आता है. विजया पूरी तरह से उनके प्रति समर्पित थीं.

पटेल ने रिश्तों पर तंज कसा और जेपी नाराज हो गए
जब भी जेपी को उनकी जरूरत हुई, वह उनका संबल बनीं. जब जरूरत हुई तब तन-मन से उनकी सेवा में जुटीं. जेपी और विजया के संबंधों पर कुलदीप नैयर ने इशारों में कुछ लिखा भी, जिस पर हल्के-फुल्के विवाद की स्थिति भी बनी. हालांकि जेपी तब जरूर खासे नाराज हो गए थे जब सरदार वल्लभ भाई पटेल ने उनके और प्रभावती के रिश्तों को लेकर कुछ तंज कसा था. जेपी इस बारे में कुछ सुनना बर्दाश्त नहीं करते थे.


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