प्रियंका गांधी को क्यों नहीं मिला पूरा उत्तर प्रदेश? कांग्रेस नेताओं ने बताई ये बड़ी वजह
File Photo


पूर्वी उत्तर प्रदेश की महासचिव के तौर पर आखिरकार प्रियंका गांधी वाड्रा की एंट्री सक्रिय राजनीति में हो ही गई. बुधवार की दोपहर 12:40 में जैसे ही ये खबर मीडिया तक एक प्रेस रिलीज के ज़रिए पहुंची उसके बाद मानो भारतीय राजनीति में एक ऐसी घटना हुई जिसका पता तो सबको था लेकिन टाइमिंग पर बीजेपी से लेकर तमाम राजनीतिक पार्टियों में मानो हड़कंप सा मच गया. एक तरफ जहां बीजेपी इसे परिवारवाद और राहुल गांधी की कमजोर छवि से जोड़कर बता रही है, वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी के सभी सवाल पर करारा जवाब देते हुए ये कह दिया कि मेरी बहन कर्मठ और मेहनती हैं. प्रियंका के राजनीति में आने से बीजेपी सदमे में है. प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई, वहीं राहुल गांधी की टीम और बेहद करीब माने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महासचिव का काम सौंपा गया.

तमाम सवालों में एक सवाल जो लगातार सभी राजनेताओं के जहन में गूंज रहा है वो ये है कि आखिर सिर्फ पूर्वी यूपी ही क्यों, पूरे उत्तर प्रदेश का प्रभार प्रियंका को क्यों नहीं दिया गया? इस सवाल की पड़ताल में  कई जवाब मिले...

पीएल पुनिया (राज्यसभा सांसद, वरिष्ठ नेता यूपी कांग्रेस) ने कहा कि सवाल ये नहीं है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश ही क्यों, प्रियंका गांधी देश की नेता है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मांग बहुत पहले से थी कि प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में आना चाहिए. आज कार्यकर्ताओं की मांग पूरी हुई है. प्रियंका गांधी चुनाव लड़ेंगी या नहीं, ये उनका निजी फैसला है लेकिन जो राजनीतिक समीकरण देखे जा रहे हैं, उसमें ये आश्चर्य नहीं कि प्रियंका गांधी भी चुनाव लड़े.

जितिन प्रसाद (पूर्व केंद्रीय मंत्री, राहुल टीम के युवा सदस्य) का कहना है- "प्रियंका गांधी का कांग्रेस में औपचारिक तौर पर आना कांग्रेस के साथ उन कार्यकर्ताओं की भी जीत है, जो लगातार प्रियंका गांधी की सक्रिय राजनीति में आने की बात दोहरा रहे थे. वही जहां तक सिर्फ पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी की बात करें तो ये बड़ी चुनौती थी, जिसे प्रियंका गांधी ने बखूबी निभाया, क्योंकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और पूर्वी यूपी के गोरखपुर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ भी आते हैं"

संजय सिंह (राज्यसभा सांसद, यूपी कांग्रेस) ने कहा कि उत्तर प्रदेश एक बड़ा प्रदेश है. लोकसभा चुनाव में कम समय होने के नाते प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच जिम्मेदारी बांटी गई है. हर मायने में राहुल गांधी का ये फैसला कांग्रेस के हित में होगा. 40/40 सीटें दोनों महासचिवों के जिम्मे हैं.

श्रीप्रकाश जायसवाल (पूर्व केंद्रीय मंत्री) का कहना है कि कांग्रेस के इस फैसले ने कांग्रेस को नया बल दिया है, इसके बाद कांग्रेस लोकसभा चुनाव में यूपी के 80 सीटों 40-45 सीटें अपने दम पर जीतेगी.

बहरहाल कांग्रेस इसे भले ही अपना मास्टरस्ट्रोक माने लेकिन इसके साथ ही प्रियंका गांधी की अग्निपरीक्षा भी शुरू हो गई है.


अधिक राज्य की खबरें