क्या 'कांग्रेस' स्वामी के दबाव के चलते VHP राम मंदिर मुद्दे से हट गई पीछे?
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क्या ये द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का दबाव था कि जिसने विश्व हिंदू परिषद को राम मंदिर मुद्दे को लेकर कोई भी आंदोलन न करने पर मजबूर किया. कांग्रेस का समर्थन करने के कारण स्वामी स्वरूपानंद को 'कांग्रेस' स्वामी भी कहा जाता है. स्वामी स्वरूपानंद इस वक्त कुंभ मेले में हैं. उन्होंने घोषणा की है कि वह 10 फरवरी को अयोध्या जाएंगे और 21 फरवरी को राम जन्मभूमि की आधारशिला रखेंगे.

तो आखिर क्या है जिसने वीएपी के राम मंदिर मुद्दे और धर्म संसद को ठंडे बस्ते में डाल दिया है? वीएचपी के कुछ अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि चूंकि पीएम नरेंद्र मोदी और सत्ताधारी एनडीए की इच्छा राम मंदिर मामले में वीएचपी का समर्थन करने की नहीं थी और साथ ही ये भी फीडबैक मिल रहा है कि 1992 के बाद जन्में वोटर्स यानी युवा मतदाताओं को राम मंदिर मुद्दे में कोई रुचि नहीं है. इसलिए वीएचपी को लगा अभी राम मंदिर मुद्दे को उठाने का सही समय नहीं है.

यह पहली बार नहीं है जह स्वामी स्वरूपानंद ने राम मंदिर के लिए कमर कसी है. फरवरी 2002 में स्वरूपानंद ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को हिंदूवादी तत्वों को अपने साथ लेने का सुझाव दिया था, जिसकी वजह से तत्कालीन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की देखरेख में सोनिया गांधी ने  दिगौरी में एक जनसभा की थी जिसमे कांची कामकोटि के शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती और पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद भी मंच पर मौजूद थे.

हालांकि, उस वक्त कांग्रेस वर्किंग कमेटी के कुछ सदस्यों ने सोनिया गांधी को इस सभा को करने के लिए मना किया था लेकिन उन्होंने इस बात को मानने से इनकार कर दिया. सोनिया गांधी का कहना था कि बिना राम मंदिर पर कोई स्टैंड लिए पार्टी के लिए यूपी में आना मुश्किल होगा. पार्टी के नेताओं का ये भी कहना था कि अगर कोर्ट का फैसला राम मंदिर बनाने के पक्ष में आता है तो वीएचपी के बजाय स्वामी स्वरूपानंद की अध्यक्षता वाला 'रामालय ट्रस्ट'  इसका निर्माण करेगा.

सोनिया गांधी के इस कदम ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी चिंता में डाल दिया था. उन्होंने संसद भवन में कहा कि जब सोनिया गांधी खुद शंकराचार्य का आशीर्वाद लेती हैं तो फिर रामचंद्र परमहंस से मिलने पर उनके ऊपर सवाल क्यों खड़े किए जाते हैं. बता दें कि परमहंस राम जन्मभूमि न्यास के मुखिया थे. उनका निधन 2003 में हुआ था.

स्वामी स्वरूपानंद हमेशा से कांग्रेस के समर्थक रहे हैं. जनवरी 2001 मे जब सोनिया गांधी के विदेशी होने का मुद्दा काफी उठा था तो इलाहाबाद में कुंभ मेले के दौरान सोनिया गांधी ने गंगा में डुबकी लगाई. इसके बाद स्वामी ने कहा था सोनिया गांधी पूरी तरह से भारतीय हैं.

2010 में स्वरूपानंद खुद को 'हिंदुओं का सुप्रीम कोर्ट' बताकर विवादों में घिर गए थे. इसके पहले एमपी के नरसिंहपुर जिले में संकल घाट गुफा पर बीजेपी सरकार में मध्य प्रदेश के तत्कालीन पर्यावरण मंत्री सरताज सिंह द्वारा गेट व दीवार बनवाए जाने का भी विरोध किया था. उनका मानना था कि आदि गुरू शंकराचार्य ने इस गुफा में ध्यान-साधना की थी.

बाद में मंत्री सरताज सिंह को पीछे हटना पड़ा क्योंकि उनको पता चला कि उनकी कैबिनेट के भी कुछ मंत्री स्वामी स्वरूपानंद का काफी सम्मान करते हैं. स्वरूपानंद का कहना था कि बीजेपी राज में बड़ी संख्या में गायों को मारा जा रहा है और उनके मांस को बाहर के देशों में भेजा जाता है.


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