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 भाजपा  सांसदों में भगदड़ तय !
चिंताग्रस्त पीएम और राष्ट्रीय अध्यक्ष


लखनऊ। इतना तो तय है कि भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव को जीतने में कोई गल्ती नही करेगी। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में यह स्पष्ट रूप से तय कर रखा है कि जनता के बीच अपनी बेहतर छबि न बना पाने वाले और पार्टी के लिए संगठनात्मक रूप से कमजोर सांसदों का टिकट काट दिया जाएगा। टिकट वितरण के बाद भाजपा के कई सांसदों की आस्था, निष्ठा और विश्वास टूटता नजर आएगा।  सूत्रों की बाॅतों पर शत प्रतिशत विश्वास किया जाए तो लगभग सौ सांसदों के टिकट भाजपा इस बार काटने जा रही है। अगर ऐसा हुआ तो ऐन चुनाव के दौरान भाजपा के सीटिंग सांसद अपनी निष्ठा बदलने में देर नही करेगें। भाजपा इस बाॅत को लेकर चितिंत भी है। सबसे ज्यादा टिकट की कटौती उत्तर प्रदेश के सांसदेां की होगी। इसके बाद मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ का नम्बर आएगा। प्रत्याशियों को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में मंथन जारी है। राज्यों से आने वाली रिपोर्ट के साथ ही केन्द्रीय नेतृत्व अपनी छानबीन के बाद ही टिकटों पर अंतिम मुहर लगाएगा। बहरहाल इतना तय है कि टिकट वितरण के साथ ही भाजपा सांसदों में भगदड़ मचना तय है।एक अनुमान के मुताबिक भाजपा 2019 के चुनाव में 30 प्रतिशत तक सीटिंग सांसदों के टिकट काटने जा रही है। यानि 282 सांसदों में से लगभग 80 सांसदों का टिकट कटना तय है।
पार्टी के अन्दरूनी सूत्रों की माने तो  इनमें सबसे ज्यादा टिकट उत्तर प्रदेश यानि लगभग दो दर्जन जिसमें संतकबीर नगर के शरद त्रिपाठी, हरदोई अंशुल वर्मा, मिश्रिख अंजूबाला, झाॅसी उमा भारती, कानुपर डा. मुरली मनोहर जोशी, बस्ती हरीश द्विवेदी, उन्नाव साक्षी महाराज, डूमरियागंज जगदम्बिका पाल के नामों की चर्चा तेज है। उधर मध्यप्रदेश में शिवराज चैहान के बेहतर कामकाज के बाद भी पार्टी की हार को लेकर शीर्ष नेतृत्व की मध्यप्रदेश के कुल 29 में से 27 भाजपा सांसदों के प्रति नाराजगी है। यहाॅ भी कम से कम 10 सीटिंग विधायकों के टिकट कटने तय माने जा रही है।  इसके बाद राजस्थान को लेकर भाजपा नेतृत्व काफी गम्भीर है। पूर्व मुख्यमंत्री वंसुधराराजे की हठधर्मिता और पार्टी को मिली करारी हार के बाद राजस्थान की कुल 25 में से 25 भाजपा सांसदों में से लगभग 20 सांसदों की टिकट पर खतरा मडरा रहा है इनमें चूरू से राहुल कस्वां,भरतपुर से सांसद बहादुर सिंह कोली,सीकर से सुमेधानंद सरस्वती,बाड़मेर से कर्नल सोनाराम,करौली धौलपुर सांसद मनोज राजौरिया,झुंझुनूं से सांसद संतोष अहलावत , बांसवाड़ा से सांसद मानशंकर निनामा,गंगानगर सांसद निहालचंद मेघवाल , जयपुर सांसद रामचरण बोहरा,राजसमंद से हरिओम सिंह राठौड़ की टिकट खतरे में है। इसके बाद महाराष्ट्र में शिवसेना गठबंधन के बाद भी भाजपा अपने 23 सांसदों में से दस का टिकट काट सकती है। झारखण्ड में 13 भाजपा सांसदो में से 5 और गुजराज में भी लगभग 5 सांसदों के टिकट कटेगें। छत्तीसगढ में विधानसभा चुनाव हारने के बाद 9 में से 7 सांसदों का टिकट सकता है। लोकसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले भाजपा नेतृत्व ने शुक्रवार को उम्मीदवार तय करने से लेकर, सूक्ष्म चुनाव प्रबंधन तक की रणनीति पर व्यापक विचार विमर्श किया। .प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने गत शुक्रवार देर रात तक चली बैठक में 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को चुनाव लड़ाने, राज्यसभा सांसदों और विधायकों को लोकसभा मैदान में उतारने को लेकर चर्चा की गई।लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर प्रधानमंत्री के साथ भाजपा नेतृत्व की यह पहली बड़ी बैठक थी। इसमें उम्मीदवारों के लिए मानक तय करने, चुनावी माहौल का जायजा लेने और विपक्षी गठबंधनों की स्थिति पर व्यापक विचार किया गया था। भाजपा नेतृत्व सांसदों को लेकर एन्टी इनकम्बेंसी को रोकने के लिए कई सीटों पर बदलाव की तैयारी में है। इसके कारण 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को लोकसभा चुनाव मैदान में न उतारने का फैसला लिया जा सकता है। दरअसल पार्टी युवा और नए उम्मीदवारों को जनता के सामने लाना चाहती है। पार्टी के सर्वे में भी व्यापक बदलाव की बात सामने आई है। लोस चुनाव के साथ हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव कराने को लेकर सहमति नहीं बन सकी है।बहरहाल टिकट घोषणां के साथ ही भाजपा के सांसदों में भगदड मचना तय है। 


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