सर्वे : बहुमत से इतनी सीट दूर रह जाएगा NDA, बढ़ेगी इन 3 दलों की भूमिका
सर्वे के मुताबिक, आंध्र में सत्तारूढ़ तेलुगू देशम पार्टी को 14 सीटें मिलने का अनुमान है.


नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. लोकसभा चुनाव सात चरणों में होगा. सीवोटर-आईएएनएस के एक सर्वे में उभरकर सामने आया है कि इस चुनाव में एनडीए को 264 सीटें मिल सकती हैं, जो कि केंद्र में सरकार बनाने के लिए बहुमत से आठ सीट कम है. दूसरी तरफ कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए को केवल 141 सीटें ही मिलने का अनुमान है. ऐसे में क्षेत्रीय दलों की अहमियत बढ़ सकती है. 

तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), आंध्र प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस और ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजेडी) की 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजों के ऐलान के बाद केंद्र सरकार के गठन में खास भूमिका हो सकती है. 

सर्वे के मुताबिक, आंध्र में सत्तारूढ़ तेलुगू देशम पार्टी को 14 सीटें मिलने का अनुमान है. बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को 34 सीटों पर जीत मिल सकती है. सीवोटर-आईएएनएस के सर्वेक्षण के मुताबिक, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, टीआरएस और बीजेडी को कुल मिलाकर 36 सीटें मिल सकती हैं. वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को आंध्र में 11 संसदीय सीट पर जीत मिल सकती है. बीजेडी को ओडिशा में नौ सीटें मिल सकती हैं. तेलंगाना में टीआरएस की आंधी चल सकती है और वह राज्य की कुल 17 लोकसभा सीटों में से 16 पर जीत हासिल कर सकती है.

इन तीनों दलों ने भाजपानीत और कांग्रेसनीत, दोनों गठबंधनों से समान दूरी बनाकर रखी हुई है. ऐसे में इनकी केंद्र सरकार के गठन में बेहद खास भूमिका हो सकती है. इनमें से किसी एक का भी समर्थन एनडीए को बहुमत दिलाने के लिए पर्याप्त होगा, अगर सर्वेक्षण जैसी ही स्थिति रही तो. गैर भाजपा-गैर कांग्रेस दलों के अनौपचारिक तीसरे मोर्चे की भूमिका कुल मिलाकर खासा महत्वपूर्ण हो सकती है. जनमत सर्वेक्षण के मुताबिक, एनडीए में शामिल जनता दल (युनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) को बिहार में 20 सीटें मिल सकती हैं, जबकि महाराष्ट्र में शिवसेना को 14 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत मिल सकती है.


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