कोर्ट का आदेश लेकर प्रमुख सचिव से मिलेंगे आयुष चिकित्सक
आयुष चिकित्सक


लखनऊ। न्यायालय से मिली राहत के बाद प्रदेश के आयुष चिकित्सक उत्साहित है। फिलहाल उच्च न्यायालय से मिले आदेष को डाक के माध्यम से प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को भेज दिया है। आयु आयुष चिकित्सकों प्रतिनिधि मण्डल होली के बाद प्रमुख सचिव से मिलकर न्याय की मांग करेगा। आयुष डाॅक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ राम सुरेश राय ने बताया कि एनएचआरएम योजना के तहत प्रदेष के एबीबीएस एवं आयुष चिकित्सकों का एक जैसा मानदेय मिलता था। उन्होंने बताया कि एक जनसूचना अधिकार के तहत दिये गए जबाब में एमबीबीएस एवं आयुष चिकित्सकों की कार्यषैली को एक समान माना गया है। उन्होंने कहा कि इसी कारण से जून 2012 तक प्रदेष के आयुष चिकित्सकों एवं एमबीबीए चिकित्सकों का मानदेय एक जैसा था। 2011 के बाद मानदेय किस आधार पर कम किया गया जबकि आयुष चिकित्सकों के मानदेय का निर्धारण उत्तर प्रदेष सरकार स्वंय करती है। 
आयूपी के आयुष चिकित्सकों अन्य राज्यों की भाॅति समान कार्य समान वेतन के मामले में दायर याचिका हाईकोर्ट ने स्वीकार करते हुए सरकार को खुले दिमाग से सोचने के लिए दो माह का समय दिया है। आयुष डाॅक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ राम सुरेश राय ने बताया कि कोर्ट से आदेश की सत्य प्रति लेकर शीघ्र ही प्रमुख सचिव स्वास्थ एवं परिवार कल्याण को उपलब्ध करा दी जाएगी तथा उनसे जनहित एवं न्यायहित मे समान कार्य समान वेतन  शीघ्र लागू करने तथा अन्य राज्यों की तरह एरियर भूगतान की माँग की जाएगी।
श्री राय ने कहा कि एक तरफ तो सरकार संविदा कर्मचारियों को तमाम सुविधाएं देने की घोषणा कर रही है ,दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में आयुष चिकित्साधिकारियों के साथ सौतेला व्यवहार ही नही शोषण की पराकाष्ठा को भी पार कर गयी है। आयुष डाॅक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ राम सुरेश राय ने कहा कि आयुष चिकित्साधिकारियों के साथ इससे बड़ा अन्याय क्या हो सकता है कि केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार अपने अधीन चिकित्साधिकारियों को समान वेतन देती है और वहीं एन एच एम में असमानता अपनी चरम सीमा पर है। बार बार पत्राचार और आग्रह करने पर भी  समान कार्य समान वेतन लागू नहीं किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट तथा  हाई कोर्ट लखनऊ बेंच के निर्देश पर भी प्रत्यावेदन दिया गया जिसमें जम्मू कश्मीर ,बिहार सहित कई राज्यों तथा सुप्रीम कोर्ट का समान कार्य समान वेतन का निर्णय का हवाला भी दिया गया,लेकिन निदेशक एन एच एम  ने उसे अस्वीकार कर दिया,जिसके विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय इलाहावाद की लखनऊ खण्ड पीठ में डाॅ राम सुरेश राय तथा अन्य द्वारा एक याचिका दाखिल की गयी थी।माननीय न्यायालय ने 16 नवम्बर 2018 के  निदेशक एन एच एम के उस पत्र को खारिज कर दिया जिसके द्वारा उन्होने समान कार्य समान वेतन के प्रत्यावेदन को अस्वीकर किया था।न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए 7 मार्च 19 को प्रमुख सचिव स्वास्थ एवं परिवार कल्याण को दो महिना का समय दिया कि अपने स्वयं के खुले दिमाग से निर्णय लें।



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