प्रदेश में नहीं होंगे आर.टी.ई. एक्ट के अन्तर्गत दाखिले
आरटीई


लखनऊ। अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि चंूकि सरकार ने पिछले 6 वर्षों से निजी स्कूलों में आर.टी.ई. अधिनियम के तहत शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति का भुगतान आर.टी.ई. अधिनियम 2009 के नियमों के अनुसार अभी तक नहीं किया है, इसलिये निजी स्कूल नये शैक्षणिक सत्र 2019-2020 में एक भी नया दाखिला आर.टी.ई. अधिनियम के तहत नहीं लेंगे। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में पहले से पढ़ रहे किसी भी बच्चे को निकाला नहीं जायेगा। अनिल अग्रवाल ने बताया कि अभी जो सरकार द्वारा मनमानी धनराशि 450-रूपये प्रति-माह का भुगतान कुछ स्कूलों को किया भी गया है, वो आर.टी.ई. अधिनियम 2009 की धारा 12(2) एवं सुप्रीम कोर्ट के 12 अप्रैल 2012 के निर्णय के खिलाफ है, और देश के कानून का खुला उल्लंघन है, क्योंकि यह राशि सरकारी स्कूलों में हो रहे प्रति-छात्र-व्यय के समकक्ष नहीं है। अनिल अग्रवाल ने बताया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(2) एवं सुप्रीम कोर्ट के 12 अप्रैल 2012 के निर्णय में साफ तौर पर वर्णित है कि सरकारी स्कूलों में प्रत-छात्र-व्यय एवं निजी स्कूलों की प्रति-छात्र-फीस में जो भी धनराशि कम होगी, उसी धनराशि का भुगतान शिक्षा विभाग निजी स्कूलों को प्रतिपूर्ति के रूप में देगा, अन्यथा यह संविधान के अनुछेद 19(जी) के अंतर्गत निजी स्कूलों के मौलिक अधिकारों का हनन होगा। अनिल अग्रवाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश शिक्षा के अधिकार नियमावली 2011 के नियम 8(2) में सरकारी स्कूलों में प्रति-छात्र-व्यय की गणना का फार्मूला भी दिया गया है। जिसके अनुसार शासन को हर वर्ष 30 सितम्बर को सरकारी स्कूलों में हो रहे प्रति-छात्र-व्यय को घोषित करना है। लेकिन आश्चर्य की बात है कि आज तक शिक्षा विभाग ने पिछले 6 वर्षों में किसी भी वर्ष की 30 सितम्बर यानि कि (1) सितम्बर 2013, (2) सितम्बर 2014, (3) सितम्बर 2015, सितम्बर 2016, (5) सितम्बर 2017 तथा (6) सितम्बर 2018 को सरकारी स्कूलों में हो रहे प्रति-छात्र-व्यय को घोषित ही नहीं किया। क्योंकि अभी तक पिछले 6 वर्षों की बकाया धनराशि का भुगतान अधिनियम की धारा 12(2) के अनुसार नहीं हुआ है, इसलिये इस वर्ष निजी स्कूल दाखिले नहीं देंगे। 


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