बसपा सरकार में तीन सीएमओ की हत्या भ्रष्टाचार का परिणाम: बृजलाल
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृजलाल


लखनऊ। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने कहा कि बसपा के भारी भ्रष्टाचार के कारण ही वर्ष 2010 से 2011 के बीच तीन मुख्य चिकित्साधिकारियों (सीएमओ) की हत्याएं हुईं। तत्कालीन बसपा सरकार के मंत्री ने अफसरों के साथ मिलकर एनआरएचएम में लूटपाट का कीर्तिमान बना डाला। 
उन्होंने कहा कि बसपा सरकार ने एनआरएचएम के विशाल बजट को हड़पने के लिए हर जिले में सीएमओ के अतिरिक्त सीएमओ परिवार कल्याण का पद सृजित कर दिया था। सीएमओ परिवार कल्याण का पद तत्कालीन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के हवाला कर दिया गया था। स्थिति यह हो गई थी कि मुख्य सीएमओ को दवाई और परिवार कल्याण के सीएमओ को कमाई का सीएमओ बना दिया गया था। बोली लगाकर इन पदों पर तैनाती की गई थी। सरकार की शह पर परिवार कल्याण विभाग के मंत्री और उनके अफसरों ने भारी लूटपाट की। बाद में मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, प्रमुख सचिव प्रदीप शुक्ला और डीजी हेल्थ डॉ. एसपी राम समेत दर्जनों डॉक्टर जेल गए और तीन सीएमओ की हत्या तक हो गई। 
पूर्व डीजीपी बृजलाल ने कहा कि 27 अक्टूबर 2010 को लखनऊ के सीएमओ परिवार कल्याण डॉ. विनोद कुमार आर्या की विकास नगर उनके आवास के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद उनके उत्तराधिकारी डॉ. वीपी सिंह की उनके गोमती नगर स्थित आवास के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह दोनों हत्याएं एनआरएचएम घोटाले के कारण तत्कालीन डिप्टी सीएमओ डॉ. योगेन्द्र सिंह सचान ने कराई थीं। उन्होंने कहा कि घटना के समय वह स्पेशल डीजी कानून-व्यवस्था थे और एसटीएफ के भी प्रभारी थे। एसटीएफ ने उस समय इन दोनों हत्याओं का खुलासा किया था और आरोपियों को गिरफ्तार किया था। दोनों सीएमओ की हत्या कराने वाले डिप्टी सीएमओ डॉ. सचान की भी 21 जून 2011 को लखनऊ जेल में हत्या कर दी गई थी, जिसका खुलासा आज तक नहीं हो सका। 


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