हर चेहरे पर मुस्कान के लिए कारवाॅ ,दायरा बढ़ा रहा विशालाक्षी फाउंडेशन
‘‘ विशालाक्षी फाउण्डेशन ’’


लखनऊ। पिछले दिनों शहर के कई क्षेत्रों में मुफलिसों, परेशानो और भूखों के बीच कुछ युवाओं की टोली को देखा। पता चला कि यह कोई एनजीओं है जिसका नाम ‘‘ विशालाक्षी फाउण्डेशन ’’ है। बातचीत करने पर पता चला कि मात्र 150 सदस्यों के इस गु्रप ने एक वर्ष  के अन्दर अपने परिवार की संख्या 1500 तक पहुचा दी। परियोजना विशालाक्षी फाउंडेशन द्वारा हेल्थी पांडा की संगति में कुछ सहयोगियों  के माध्यम से संचालित की गई थी । विभिन्न परियोजनाओं एवं नुक्कड़ कार्यक्रम के तह्त अब तक इस एनजीओं ने लगभग 1500 छोटे बड़े आयोजन कर लगभग 15000 से अधिक जरूरतमंदों का कुछ न कुछ सहयोग कर उनके चेहरों पर मुस्कान लाने की कोशिश की। संस्था इस दायरे को आगे बढ़ाने के लिए अपना काॅरवा, दायरा और संसाधन बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहा है। 
फाउंडेशन की शुरुआतु कैंसर पीड़ितो के लिए काम रहे  के रूप में काम कर रहे  निलय अग्रवाल  द्वारा की गई थी । पिछले दो माह में  60 से भी ज्यादा आयोजन में कामकाजी पेशेवर और छात्र मौजूद इस संस्था के साथ शामिल रहे। इसमे 1000 से ज्यादा बेघर लोगो को खाना खिलाया गया । संस्था ने  शर्मा चाय लालबाग , सिविल अस्पताल , 1090 , फन रिपब्लिक मॉल , जनेश्वर मिश्र पार्क , निशातगंज स्लम , हनुमान सेतु , मनकामेश्वर मंदिर और पॉलिटेक्निक जैसे स्थानों पर अपने आयोजन कराये। 
फाउण्डेशन के निलय अग्रवाल ने बताया कि  हमारी नींव वर्तमान में विभिन्न कंपनियों और कॉलेजों से आने वाले 150़ युवा स्वयंसेवकों के पास है और दिल्ली, गुड़गांव और लखनऊ में काम कर रहे हैं। हम वंचित बच्चों की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और अब तक हमने लगभग 10 कार्यशालाएं आयोजित कर चुके है। इसमें विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के बच्चों के साथ होली सेलिब्रेशन, स्टेशनरी वितरण कार्यशाला, कला और गायन प्रतियोगिता, डेंटल चेकअप वर्कशॉप आदि शामिल हैं। हम सभी अपने काम के बाद और ज्यादातर साप्ताहिक अवकाश के बाद अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकाल लेते हैं। हम जितना हो सके उतने लोगों की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारी दृष्टि यह सुनिश्चित करने की है कि कोई भी बच्चा शिक्षा के अपने मूल अधिकारों से वंचित न रहे और समानता बनी रहे। बेहतर भारत बनाने के लिए शिक्षा ही एकमात्र रास्ता है। हम युवा लोगों का एक बढ़ता हुआ नेटवर्क हैं जो एक अंतर बनाने में विश्वास करते हैं।
इस संस्था के बारे में हेल्थी पाण्डा बताती है कि किसी भूखे को भरपेट खाना खिलाते हुए या फिर किसी बुजुर्ग को रोड पार कराते हुए किसी शख्स को देखकर आपका भी मन लोगों की मदद करने लिए करने लगता है। मगर अपनी लाइफ के बिजी शेड्यूल के चलते हम चाहते हुए भी ऐसा नहीं कर पाते हैं। लेकिन हमने अपनी संस्था में ऐसा करने की चाहत रखने वाले काफी लोगों को जोड़ रखा है। हमारा अगला प्रयास है कि ये संस्था देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में ऐसे पुस्तकालयों की स्थापना कराये, जहां खेल-खेल में शिक्षा भी दी जाती है। इसके लिए कई संगठनों के साथ मिलकर हम आगे के कार्यक्रम तय कर रहे है। आप इनके लिए खिलौनो को पैक करने और उन्हें बच्चों में बांटने के लिए दान कर सकते हैं।
संस्था के एक सहयोगी देंवाग रस्तोग बताते है कि शहर से लेकर गाॅवों तक में आवारा घूमते जानवरों की दशा दयनीय है हम उनके लिए भी कुछ करने की योजना बना चुके है।  समाज में हजारो की संख्या में बूढ़े-बुजुर्गों एकांकी जीवन बीता रहे है। संस्था का प्रयास है कि ऐसे एकांकी जीवन जी रहे बूढ़े और बुजर्गो के साथ हमारी संस्था के बच्चे, बच्चियाॅ और बड़े सप्ताह में कम से कम एक दिन उनके साथ परिवार की तरह रहे और उनके चेहरे में मुस्कान लाने की कोशिश करे। अमित जैन ने बताया कि संस्था भूखों का पेट भरने के लिए अपने संसाधनों के साथ साथ होटलों और विभिन्न समाजिक आयोजन जैसे शादी विवाह से लेकर अन्य भव्य आयोजनों में बचने वाले शुद्व भोजन को एकत्रित कर उनका वितरण जरूरतमंदों को वितरित करने, घर घर से मिलने वाली दान की पुस्तकों, कपड़ों और अन्य जरूरत की समानों को एकत्रित कर उनका सामुहिक वितरण करने का काम कर रही है।संस्था के साथ लम्बे अरसे से काम कर रहे आदित्य सिंह ने बताया कि  हम जल्द ही कुछ ऐसे सदस्य की एक सीरिज बनाने जा रहे है जो पढ़ाई लिखाई से वंचितों के बीच जा कर उन्हें मुफ्त रूप से शिक्षित करने का प्रयास करेगी। इस सीरिज में पहले चरण में सौ सदस्य होगे और प्रत्येक सदस्य कम से कम दस बच्चों को शिक्षित करेगा। संस्था के अविरल सिन्हा ने बताया कि हमारी संस्था जल्द ही देश के हर राज्य में अपना प्रान्तीय कार्यालय स्थापित कर देश के हर कोने में पहुंचकर कुछ न कुछ सामाजिक सेवा करने जा रहे है। संस्था के सहयोगी दिलप्रीत ंिसह, मेरिनालिका गौस्वामी और स्वेता मेहता बताती है कि हम लगातार ऐसे लोगों के सम्पर्क में है जो समाज के लिए कुछ करना चाहते है। हम सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों से सम्पर्क कर उनसे मदद लेने जा रहे है। हम इनका मार्गदर्शन लेगें और कुछ घन्टो का श्रमदान लेकर हम समाज के हर उस चेहरें पर मुस्कान लाने के लिए काम करेगें जो आर्थिक, सामाजिक और शारीरिक रूप से दूखी है। हमारा प्रयास होगा कि हम जल्द से जल्द उस पीड़ित, जरूरतमंद तक पहुंचे जिसे हमारी जरूरत है। 


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