मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बुलाई आपात बैठक
ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड


लखनऊ। ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड की लखनऊ में बुलाई गई बैठक को अयोध्या मामले में जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव महमूद मदनी के बयान के परिपेक्ष्य में लिया जा रहा है। चर्चा है कि महमूद मदनी ने स्पष्ट बयान दिया है कि अयोध्या में विवादित ढांचा मस्जिद नही। बहरहाल अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि व बाबरी मस्जिद की जमीन को लेकर विवाद में सुप्रीम कोर्ट के मध्यस्थता समिति का गठन करने के बाद भी मामला पटरी पर नहीं है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस मामले को लेकर लगातार बैठक कर रहा है। लखनऊ में आज एक बार फिर आपात बैठक बुलाई गई है। इससे पहले भी 12 मार्च को लखनऊ के नदवा कॉलेज में आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद के पक्षकारों के साथ अन्य मौलानाओं के साथ भी बैठक की थी।
अयोध्या के श्रीरामजन्मभूमि तथा बाबरी मस्जिद की जमीन के विवाद को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने आज लखनऊ में इमरजेंसी बैठक आयोजित की है। माना जा रहा है कि बैठक में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सभी 51 सदस्यों के साथ ही सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इस मामले में अभी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मध्यस्थता की कोशिशों के बीच सहमति की मुहिम चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था।रामजन्मभूमि - बाबरी मस्जिद सुलझाने के लिए मध्यस्थता टीम 26 मार्च को एक बार फिर अयोध्या का दौरा करेगी। मध्यस्ता टीम के लिए नोडल बनाए गए एडीएम सिटी डॉ. वैभव शर्मा ने कहा कि अभी कोई आधिकारिक कार्यक्रम नहीं आया। मध्यस्थता टीम के आने की हलचल फिर से तेज है। चर्चा है कि तीन दिनी सुनवाई 27 मार्च से शुरू होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्ता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश मो. इब्राहिम कलीफुल्ला को तीन सदस्यीय टीम का अध्यक्ष नामित किया है। आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू को सुप्रीम कोर्ट ने सदस्य नामित किया है। तीन दिनी सुनवाई कर मध्यस्ता टीम 14 मार्च को वापस चली गई थी। पक्षकारों से वार्ता फिर डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि के गेंदालाल दीक्षित अतिथि गृह में होगी।  ज्ञात हो कि महमूद मदनी ने स्पष्ट रूप से एक कार्यक्रम में सर्वाजनिक रूप से कहा था कि अगर किसी धार्मिक स्थल को तोड़कर अल्लाह की इबादतगाह बनाई गई तो उसे मजिस्द नही माना जा सकता। 


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