नियामक आयोग का रेनासेन्ट पावर को झटका
उ.प्र. पावर कार्पोरेशन


लखनऊ।स्टेट बैंक आफ इण्डिया द्वारा विद्युत नियामक आयोग में दाखिल याचिका जेपी एसोसिएट की हाई प्रोफाइल प्रयागराज पावर जनरेशन कम्पनी की वित्तीय स्थिति खराब होने के कारण उसका मालिकाना हक टाटा पावर की पूर्ण स्वामित्व वाली कम्पनी रेनासेन्ट पावर बेन्चर प्रा. लि. व अन्य को दिलाने पर विद्युत नियामक आयोग की पूर्ण पीठ अध्यक्ष राजप्रताप सिंह, सदस्यगण  एसके अग्रवाल व कौशल किशोर शर्मा द्वारा देश का पहला ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया है, जिससे आने वाले समय में प्रदेश की जनता को बड़ा लाभ होगा।  बिडिंग रूट के इस प्रोजेक्ट में जहाँ स्टेट बैंक आॅफ इण्डिया द्वारा पूरे प्रोजेक्ट की ओरिजिनल प्रोजेक्ट कास्ट रू. 10,780 करोड़ मानकर रू. 8000 करोड़ का लोन दिया गया था और जिसे रेनासेन्ट पाॅवर व अन्य को रू.6000 करोड़ में शेयर हस्तांतरित किया गया और रू0 2000 करोड़ का हेयर कट आॅफ (कमी) की गयी थी, जिसको लेकर आयोग मेें अन्तिम सुनवाई 25 मार्च को की गयी थी और फैसला सुरक्षित था, जिस पर आयोग द्वारा अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए यह निर्णय दिया गया है कि रेनासेन्ट पाॅवर को यह शेयर तभी ट्रान्सफर माने जायेंगे जब फिक्स काॅस्ट में 0.14 पैसे प्रति यूनिट की कमी की जाये, यानि कि बिडिंग रूट की तय लेबलाइज टैरिफ रू. 3.02 प्रति यूनिट में कमी होकर अब यह रू.2.85 प्रति यूनिट होगी।  इससे जहाँ प्रतिवर्ष लगभग 160 करोड़ रू. का फायदा होगा वहीं आने वाले 22 वर्षों में पाॅवर कार्पोरेशन को लगभग 3520 करोड़ का लाभ होगा और अन्ततः जिसका फायदा जनता को मिलेगा।  देश का यह पहला मामला है जिसमें बैंक द्वारा हेयर कट आॅफ किये जाने पर बिडिंग रूट की दर में कमी की गयी है।  आयोग द्वारा अपने आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि नया क्रेता यानि कि रेनासेन्ट पाॅवर प्रोजेक्ट भविष्य में यदि कोई भी अतिरिक्त खर्च करेगा और उससे सम्बन्धित जो भी याचिका आयोग में लम्बित है वह उसे वापस लेना होगा और भविष्य में उपभोक्ता पर ऐसे खर्चों के आधार पर टैरिफ में कोई भी अतिरिक्त बढ़ोत्तरी नहीं की जायेगी और न ही इसे कहीं किसी विधिक फोरम पर कम्पनी चुनौती ही देगी।  उपभोक्ता परिषद की दरों में कमी की इस लड़ाई में यदि उ.प्र. पावर कार्पोरेशन मन लगाकर पूरी पारदर्शिता से साथ देता तो आज दरों में 0.14 पैसे प्रति यूनिट की जगह लगभग 0.40 पैसे प्रति यूनिट की कमी होती। 
याचिका में उपभोक्ताओं के हितों की पैरवी करने के लिए आयोग द्वारा अधिकृत उ.प्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा की लम्बी लड़ाई काम आयी।  उपभोक्ता परिषद लगातार इस बात की मांग कर रहा था कि बैंक द्वारा जो भी धनराशि में कमी की जा रही है वह पब्लिक का पैसा है इसलिए मौजूदा दरों में कमी की जाये।  आयोग द्वारा उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष के उस बिन्दु को आदेश का मुख्य आधार बनाया गया है जिसमें उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा था कि विद्युत अधिनियम, 2003 की प्रस्तावना पूरी तरह स्पष्ट है कि आयोग उपभोक्ता हित मे कोई भी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।  नियामक आयोग को उपभोक्ता हित में निर्णय लेते हुए दरों में कमी करना चाहिए।  चाहें यह बिडिंग रूट का ही प्रोजेक्ट क्यों न हो।  उपभोक्ता परिषद ने आगे जोरदार तरीके से अपने विधिक तर्कों के आधार पर यह सिद्ध किया था कि जब तक दरों में कमी न हीं होगी, तब तक कम्पनी का शेयर टाटा पावर की स्वामित्व वाली रेनासेन्ट पाॅवर को ट्रान्सफर न किया जाये। 
आयोग द्वारा सुनाए गये इस फैसले के बाद पूरे भारत देश के ऊर्जा क्षेत्र में हंगामा मचा है क्योंकि यह फैसला दूसरे राज्यों में नजीर बनेगा।  कहीं इस फैसले को टाटा पाॅवर की स्वामित्व वाली कम्पनी व स्टेट बैंक किसी अपीलिएट फोरम में स्टे न करवा ले, इसलिए उ.प्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थाई सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने पूरी लाबिंग शुरू कर दी और आज ही आयोग आदेश की एक प्रति के आधार पर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा से शक्ति भवन में उनके कार्यालय में मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा और उसमें यह मांग उठायी कि पाॅवर कार्पोरेशन अविलम्ब अपीलिएट फोरम में कैबिएट दाखिल करे, अन्यथा की स्थिति में इस आदेश पर विपक्षी पार्टी रोक लगवा लेंगी।  उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने ऊर्जा मंत्री जी से पावर कार्पोरेशन की शिकायत करते हुए कहा कि पाॅवर कार्पोरेशन यदि उपभोक्ता परिषद का साथ देता तो आज दरें और कम होती, इसलिए इसकी उच्चस्तरीय जाँच करायी जाये।ऊर्जा मंत्री ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वस्त किया कि चूँकि देश में चुनाव आचार संहिता लागू है इसलिए इस पर अभी मेरे द्वारा कुछ कहना उचित नहीं होगा, लेकिन पूरे मामले पर उपभोक्ता हित में उचित निर्णय लिया जायेगा।  


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