नगर निगम का खजाना भरा, कर्मचारियों में बकाए भुगतान आस जगी
नगर निगम


राज्य कर्मचारियों के बकाया 90 करोड़ राज्य वित्त आयोग से 48 और ओटीएस में मिला 55 करोड़
लखनऊ। नगर निगम कर्मचारियों की लम्बे अरसे से बकाया राशि के भुगतान की आस जगी है। नोटबंदी के बाद नगर निगम का खजाना एक बार फिर भरा है। नगर निगम को राज्य वित्त आयोग से कर्मचारी मद में एक मुश्त 48 करोड़ रूपये तो मिले ही साथ में एक मुश्त समाधान योजना के तहत गृहकर के रूप में केवल मार्च माह में 55 करोड़ की भारी भरकम रकम मिलने से नगर निगम मालामाल हो गया है। निश्चित तौर पर ओटीएस एवं राज्य आयोग से मिलने वाली राशि का आभास नगर निगम कर्मचारी संघ लखनऊ को हो गया था तभी चंद दिनों पूर्व ही संघ के अध्यक्ष आनंद वर्मा ने महापौर और नगर आयुक्त को पत्र लिखकर नगर निगम कर्मचारियेां के बकाए मद में भुगतान का अनुरोध भी किया था। नगर निगम कर्मचारी संघ ने यह तर्क भी रखा था कि ओटीएस मद से मिलने वाली धनराशि से अधिकाधिक भुगतान कर्मचारियो के बकाए का किया जाए। 
बताया जा रहा है कि नगर निगम लखनऊ में 4700 नियमिति तथा 34 सौ के लगभग सेवानिवृत्त तथा सात हजार कार्यदायी संस्था के कर्मचारी कार्यरत है। इन कर्मचारियेां का वेतन,पेंशन, बीमा, मंहगाई भत्ता, गेेच्युटी आदि मद में नगर निगम के उपर लगभग 80.90 करोड़ रूपये बकाया है। यही रकम अगर सातवें वेतनमान के आधार पर जोड़ दी जाए तो यह धनराशि 125 करोड़ के लगभग हो जाएगी। अब जबकि नगर निगम को राज्य वित्त आयोग और गृह कर के माध्यम से एक मुश्त धनराशि प्राप्त हो गई है तो उसकी प्राथमिकता पहले कर्मचारियों के बकाए के भुगतान की होनी चाहिए। नगर निगम कर्मचारी संघ लखनऊ पहले ही ओटीएस के माध्यम से जमा होने वाली धनराािश् के भुगतान में नीति निर्धारण की बाॅत कर चुका है। ऐसे में नगर निगम प्रशासन को इस बाॅत का ध्यान रखना होगा कि गृह कर से प्राप्त 55 करोड़ की धनराशि में से अधिकाधिक धनराशि से कर्मचारियेां का कर्जा चुकाया जाए। अब बाॅत राज्य वित्त आयोग की धनराशि की करे तो राज्य वित्त आयोग की गाइड लाइन के अनुसार राज्य वित्त की धनराशि इसी शर्त और नियम के आधार पर दी जाती है कि इसका भुगतान पहले कर्मचारियों को किया जाए अगर धनराशि बढ़ती है तो इसे विकास कार्य पर खर्च किया जाए। बहर हाल अब यह देखना होगा कि कर्मचारी संगठनों को महापौर और नगर आयुक्त के भरपूर आश्वासन के बाद कितना भुगतान हो पाता है। उधर इस धनराशि को लेकर कर्मचारियों में उत्साह है और संगठन की तरफ से पूरी नजर रखी जा रही है। 
नोटबंदी के दौरान भी जागी थी आशा
इससे पूर्व भी एक बार नगर निगम का खाली खजाना नोटबंदी के दौरान भर चुका है। उस दौरान भी नगर निगम कर्मचारियों को लगा था कि उनके बकाये का भुगतान हो जाएगा। लेकिन उस समय के चर्चित वित्त एवं लेखाधिकारी ने वह राशि बाॅदर बाॅट करते हुए ठेकेदारों की झोली में डाल दी और कर्मचारियों के हिस्से में कुछ नही आया। बताया जा रहा है कि नोटबंदी के दौरान लगभग 80 करोड़ रूपये नगर निगम को राजस्व प्राप्त हुआ था। उस दौरान भी संगठन ने मांग रखी थी लेकिन उसे केवल आश्वासन मिला था कहा जा रहा है कि उस दौरान अगर नीति निर्धारण कर पचास पचास प्रतिशत की हिस्सेदारी तय कर दी जाती तो आज यह बकाया 80 से 90 करोड़ तक न होता। 
अबकी बार चुप नही बैठेगा संगठन: आनंद वर्मा 
इस सम्बंध में नगर निगम कर्मचारी संघ लखनऊ के अध्यक्ष आनंद वर्मा ने कहा कि हम पिछले लम्बे अरसे से कर्मचारियों के बकाए भुगतान के लिए संघर्षरत है। एक मुश्त समाधान योजना में प्राप्त धनराशि और राज्य वित्त आयोग से मिली धनराशि को मिलाकर लगभग 103 करोड़ रूपये नगर निगम को प्राप्त हुए है। हम उक्त धनराशि की बंदरबाॅट नही होने देगें। नगर निगम कर्मचारी संघ इस बार पूरी तरीेके से इस धनराशि के भुगतान पर नजर रखेगा। नगर निगम कर्मचारी संघ अपनी बाॅत और मांग से महापौर और नगर आयुक्त को मौखिक एवं लिखित रूप से अवगत करा चुका है। अगर आश्वासन के बावजूद धनराशि का दुरप्रयोग किया गया तो संघ चुप नही बैठगा। 


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