हवेली में एंट्री के बाद स्मृति अमेठी फतह के लिए उत्साह से लबरेज
अमेठी से भाजपा विधायक गरिमा सिंह से मुलाकात के बहाने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को इस हवेली में एंट्री मिल चुकी है। (Pic : Facebook)


अमेठी, (हि.स.)। कांग्रेस के गढ़ अमेठी के जिस 'भूपति भवन' में कभी कांग्रेस की सियासत का खाका तैयार होता था, वहां आज बीजेपी की चौपाल सज रही है। अमेठी से भाजपा विधायक गरिमा सिंह से मुलाकात के बहाने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को इस 'हवेली' में एंट्री मिल चुकी है। गरिमा से मुलाकात के बाद स्मृति उत्साह से लबरेज हैं। कांग्रेस के इस अभेद्य दुर्ग को फतह कर अबकी संसद में पहुंचने का उनका इरादा बहुत साफ है। 

अमेठी राज परिवार का नेहरू गांधी परिवार से बेहद करीबी रिश्ता रहा है। यहां के राजा माधव बख्श सिंह ने ही मोतीलाल नेहरू को आनंद भवन बनवाने की सलाह दी थी। 1926 में जवाहरलाल नेहरू ने फैजाबाद-मछली शहर संयुक्त सीट से चुनाव लड़ा था। तब उनका राजनीतिक केन्द्र अमेठी रियासत ही थी। इसके बाद यहां के राजा हुए रणंजय सिंह संतानहीन थे। 1962 ई. में राजा रणंजय सिंह ने ब्लॉक भेटुआ के अमेयमाफी निवासी गयाबख्श सिंह के पुत्र संजय सिंह को अपना दत्तक पुत्र बनाया। उस समय संजय सिंह कक्षा पांच की पढ़ाई कर रहे थे। रणंजय सिंह की मृत्यु के बाद संजय सिंह अमेठी के राजा बने। नेहरू के बाद संजय गांधी और फिर राजीव गांधी ने अमेठी को अपनी राजनीतिक कर्म भूमि बनाई। 

उस वक्त यहां के राजा संजय सिंह के भी गांधी परिवार से बेहद करीबी रिश्ते थे लेकिन 1989 में इन रिश्तों में दरार पड़ी। इतना ही नहीं 1999 में तो संजय सिंह सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव भी लड़े। 2004 में संजय सिंह फिर कांग्रेस में आ गए और वर्तमान में कांग्रेस के टिकट से सुल्तानपुर से ताल ठोंक चुके हैं। अमेठी राजघराने पर इस समय कांग्रेस सांसद संजय सिंह और उनकी दूसरी पत्नी अमिता सिंह का बड़ा कब्जा है। थोड़े से हिस्से में संजय सिंह की पहली पत्नी एवं वर्तमान में अमेठी से विधायक गरिमा सिंह का कब्जा है।
रियासत से जुड़े लोग बताते हैं कि देश में जब रियासतों के विलय का अभियान चला था। तब नेहरू जी ने रणंजय सिंह को मंत्री बनने का प्रस्ताव दिया था, परन्तु उन्होंने नकार दिया था। 

गुरुवार को परशदेपुर की सभा के बाद केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी राज्यमंत्री सुरेश पासी के साथ हवेली में संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा सिंह से मुलाकात करने पहुंचीं। हवेली के ड्राइंग रूम में विधायक और उनके बेटे अनंत विक्रम के साथ चुनाव को लेकर उनकी लम्बी मंत्रणा चली। उस वक़्त हवेली के बाहर खड़ी भीड़ में कुछ लोग यह चर्चा भी कर रहे थे कि हवेली में एंट्री के बाद क्या स्मृति ईरानी कांग्रेस का यह गढ़ जीत पाएंगीं? हालांकि हवेली से बाहर निकलने के बाद स्मृति ईरानी की हाव-भाव से झलक रहा था कि वह अबकी बार अमेठी फतह करके ही दिल्ली लौटेंगी।


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