वेतन न मिलने से नाराज सिटी बस कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार का ऐलान
सिटी बस


लखनऊ। स्कूलों में नए सत्र की पढ़ाई शुरू हो गई है। एक महीना भी बीत चुका है। लेकिन सिटी बस कर्मचारी अपने बच्चों की फीस तक जमा नहीं कर पा रहे हैं। इससे उनके बच्चों को स्कूलों से बाहर निकालने की नौबत आ गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि सिटी बस कर्मचारियों को पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। यह हाल तब है जब नगरीय निदेशालय अप्रैल तक सारा अनुदान सिटी बस प्रबंधन को दे चुका है। इसको लेकर मंगलवार दुबग्गा डिपो में सिटी बस ड्राइवर और कंडक्टर ने मिलकर एआरएम से बात की। सहमति नहीं बनी तो कर्मचारियों ने 14 अप्रैल से कार्य बहिष्कार का ऐलान कर डाला।
कर्मचारी संगठन के मुताबिक पिछले तीन माह से सिटी बस ड्राइवर और कंडक्टर को वेतन नहीं मिला है। इससे कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका फरवरी महीने से वेतन बकाया है। दरअसल, सेंट्रल रीजनल वर्कशाप कर्मचारी संघ के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में ड्राइवर और कंडक्टर दुबग्गा एआरएम सतीश पाल के पास वेतन भुगतान की बात करने पहुंचे। लेकिन, एआरएम ने यह कहकर कर्मचारियों को मना कर दिया कि पैसा नहीं है। इससे कर्मचारियों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया।संघ के क्षेत्रीय मंत्री लखनऊ महानगर परिवहन सेवा व दुबग्गा डिपो के कार्यवाहक शाखामंत्री राजकमल सिंह के मुताबिक सिटी बस प्रबंधन और एआरएम के तानाशाही रवैये के चलते कर्मचारियों को परेशानियां हो रही है। उन्होंने एआरएम को एक सप्ताह का समय दिया है। उन्होंने कहा कि अगर एक महीने में कर्मचारियों का वेतन नहीं मिला तो 14 अप्रैल से सिटी बस ड्राइवर व कंडक्टर कार्य बहिष्कार करेंगे।राजकमल सिंह ने बताया कि 2012 में डीपीआर का अनुमोदन हुआ था। इसमें जिन रूटों पर सिटी बसों का संचालन होना था तैयार किया गया था। लेकिन, डीपीआर के हिसाब से तैयार रूट पर बसों का संचालन नहीं किया जा रहा है। वहीं, दो करोड़ की अनुदान राशि आने के बाद भी दुबग्गा से 77 बसें और गोमतीनगर से 40 बसें ही संचालित हो रही हैं। जबकि दो रूट 43एच-दुबग्गा, भिठौली होते हुए विराजखंड और 46ए- दुबग्गा-पीजीआई वाया अवध अस्पताल पर आधे से ज्यादा बसों का संचालन हो रहा है। उन्होंने कहा कि सिटी बस प्रबंध निदेशक आरिफ सकलैन के मनमाने रवैये से सिटी बस को घाटा हो रहा है। क्षेत्रीय मंत्री के मुताबिक गत वर्ष छह अगस्त को कर्मचारियों के मांगपत्र को लेकर आरिफ सकलैन ने अपनी सहमति दी थी। इसमें कर्मचारियों को वेतन प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में किया जाना था। शुरू में इस व्यवस्था का पालन हुआ, लेकिन फिर से कर्मचारियों का तीन माह को वेतन रुक गया। उन्होनें बताया कि दुबग्गा और गोमतीनगर मिलाकर कुल 1300 कर्मचारियों में 850 ड्राइवर और कंडक्टर हैं जबकि अन्य संविदा कर्मी शामिल हैं।


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