बारूद के ढ़ेर अमीनाबाद और हीवेट रोड़
अमीनाबाद में दुकान की बेसमेंट में आग


अमीनाबाद में दुकान की बेसमेंट में  आग, सबकुछ  खाक
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अमीनाबाद स्थित सोमिल ट्रेडर्स की दुकान में बृहस्पतिवार सुबह भीषण आग लग गई। आग में सबकुछ जलकर खाक हो गया।
सबसे खास बाॅत यह कि यह पूरा क्षेत्र बारूद के ढ़ेर पर बैठाा है लेकिन जिला प्रशासन, नगर निगम, विकास प्राधिकरण अन्जान बना बैठा है। रिहाशी क्षेत्र में भी होटल और रेस्टोरेन्ट मानक विहीन चल रहे है लेकिन किसी को इनकी जाॅच की फुर्सत नही। बिना पार्किग के बड़े बड़े मल्टी स्टोरी काम्पलेस, आवासीय आपार्टमेन्टों में खुंले होटल और उसके बेसमेन्ट में धधक रही कोयले की भाट्टिया किसी को दिखाई नही पड़ रही है। ऐसे में इस क्षेत्र की किस बिल्डिग, मल्टी काम्पलेक्स में कब आग लग जाए कोई पता नही। दुकान में कूलर का होलसेल का काम होता है। आग दुकान के बेसमेंट में लगी। फायर सर्विस की पांच गाड़ियां ने मोर्चा सम्हाला था। 
ज्ञात हो कि गत वर्षो में होटल एवं रेस्टोंरेन्टों में इस तरह के भीषण हादसे हो चुके है। इसे जनता का दुर्भाग्य ही कहे कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाए हुए है। राजधानी के हीवेट रोड़ पर तो एक ऐसा रेस्ट्रोरेंट है जो आवासीय मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के बैसमेन्ट पर रेस्टोंरेट खोलकर मानक के विपरीत कोयले की भाट्टिया का उपयोग कर रहा है। सूत्र बताते है कि बिल्डर द्वारा बिक्री के वक्त इस बाॅत की सख्त हिदायत एवं लिखा पढ़ी की गई थी कि किसी तरह की भट्टी का प्रयोग नही होगा इसके बावजूद वह लम्बे अरसे इसका गोरखधंधा जारी है। यह खस्ते का रेस्टोरेंट रत्ती के नाम से चल रहा है। ज्ञातत्व हो कि एलडीए के नक्शें के आधार पर बैसमेन्ट में पार्किग स्थल होता है लेकिन यह गनी नाम का आपर्टमेन्ट ने बैसमेंट तक में दुकानें बेच रखी है। यही नही इसी बैसमेन्ट की दुकान का उद्घाटन तत्कालीन मेयर और वर्तमान उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा द्वारा किया गया था लेकिन उनके द्वारा मेयर होते यह नही पूछा गया था कि रेस्टोरेंट में आने वाले ग्राहकों के वाहन कहाॅ पार्क होगें। इसका परिणाम यह है कि यहाॅ आने वाले ग्राहक अपने वाहनों की पार्किग सड़क पर करते है और बार बार यहाॅ जाम का सामना करना पड़ता है। इस बिल्डिग में लगभग बीस परिवार भी रहते है। इसी तरह के कई भवन है जो स्वंय आग से खेल रहे है। अमीनाबाद के हालात तो बहुत बुरे है। यहाॅ 90 फीसदी भवन अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे है। 


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