कई जन प्रतिनिधि और नौकरशाहों का काला चिटठा राजभवन के हवाले
लोकायुक्त प्रशासन का वर्ष 2018 का वार्षिक प्रतिवेदन


लखनऊ। प्रदेश के लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा व उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव ने शुक्रवार को राज्यपाल राम नाईक से मिलकर लोकायुक्त प्रशासन का वर्ष 2018 का वार्षिक प्रतिवेदन उन्हें सौंपा। इसमें ऐसे प्रतिवेदन एवं संस्तुतियां भी शामिल हैं, जिसमें कई जन प्रतिनिधि एवं नौकरशाहों दोषी ठहराए गए हैं। लोकायुक्त प्रशासन के मुख्य अन्वेषण अधिकारी राकेश कुमार और सचिव पंकज कुमार उपाध्याय ने पत्रकारों से बातचीत में वार्षिक प्रतिवेदन के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त की ओर से वर्ष 2018 में कुल 22 प्रतिवेदन एवं 6 संस्तुतियां सक्षम प्राधिकारी को भेजी गई। इसके अलावा कुल 6 विशेष प्रतिवेदन राज्यपाल को भेजे गए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इन मामलों में पिछली सरकारों के कुछ मंत्री और नौकरशाह दोषी पाए गए हैं। हालांकि उन्होंने कोई और ब्योरा देने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि लोकायुक्त प्रशासन को वर्ष 2018 में कुल 3915 परिवाद प्राप्त हुए। पूर्व से लंबित 882 परिवादों को इसमें शामिल करते हुए 4797 परिवादों पर कार्रवाई की गई। वर्ष 2018 में कुल 3564 परिवादों का निस्तारण किया गया। इसमें प्रारंभिक स्तर पर निस्तारित 3169 और जांच के बाद निस्तारित 395 परिवाद शामिल हैं। गत 31 दिसंबर 2018 तक कुल 1233 परिवाद लंबित थे, जिन पर कार्रवाई प्रचलित है। पद के दुरुपयोग या कुप्रशासन के कारण परिवादियों के साथ अन्याय के मामलों में कार्रवाई करते हुए वर्ष 2018 में 650.65 लाख रुपये का भुगतान कराया गया। इसमें रिटायरमेंट संबंधी मामलों में राहत पहुंचाए जाने के मामले भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि लोकायुक्त संगठन के अधिकार, कार्यप्रणाली और परिवाद दायर करने के संबंध में आम जनता को जागरूक करने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में शिविर आयोजित किए गए। इसके अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे 540 छात्र-छात्राओं को ग्रीष्मकालीन-शीतकालीन अवकाशों में व्यवहारिक प्रशिक्षण कराया गया।


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