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इसलिए मनाई जाती है शब-ए-बरात...
शब-ए-बरात



लखनऊ: शनिवार को शब-ए-बरात के मौके पर मस्जिदों और मुस्लिम बहुल इलाकों में खास चहल-पहल रही। शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी और शहर मुफ़्ती मुफ़्ती सलीम अहमद कासमी के मुताबिक इस रात की बड़ी फजीलत है। इसी रात अल्लाह अपने फरिश्तों को पूरे साल की जिम्मेदारी सौंप देता है। यानी किसकी मौत होनी है. किस की पैदाइश, किसकी शादी होनी है, किसको मिलेगा रोजगार सारा लेखा-जोखा फरिश्तों को सौंप दिया जाता है और अल्लाह पहले आसमान पर आ जाते है। इस रात इबादत का खास एहतिमाम किया जाता है, गरीबों में इमदाद बांटी जाती है।

बताया कि घरों में ओरतों को एहतमाम के साथ कुरान शरीफ की तिलावत करनी चाहिये और नममज पढ़नी चाहिए। महिलाएं घरों में नफिल नमाज पढ़ती हैं और अपने रब के सामने गिड़गिड़ाते हुए अपने और परिवार के लिये दुआ करती हैं। नायब शहर काजी सैय्यद अशरफ हुसैन कादरी ने बताया कि इस रात की बड़ी फजीलते हैं। रात में शरीयत और हदीस के मुताबिक कब्रिस्तान में जाना चाहिए और वहां फातिहा पढ़ना चाहिए। उन्होंने युवाओं से हुड़दंग न मचाने की अपील की है। कहां की रात को बाइको पर हुड़दंग मचाने से और लोगो को दिक्क्त होती है। जो इस्लाम के खिलाफ है।

दानिश क़ुरैशी भी बताते हैं कि कि इस्लाम मे शब-ए-बारात की अहम फजीलत बताई गई हैं। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक शब ए बारात शाबान महीने की 15 वी तारिख को मनाई जाती हैं । शब ए बारात दो शब्दों से मिलकर बनी है जिसमे शब का मतलब रात और बारात का मतलब बरी हैं, यानी शब ए बारात की पाक रात को इबादत करके इंसान हर गुनाह से बरी हो सकता हैं।  यह इबादत की रात होती है।


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