पूर्वांचल की 26 पर भाजपा के सामने सुहेलदेव पार्टी का अड़गा
ओम प्रकाश राजभर



जीएनएस
लखनऊ। लगभग दो साल से अधिक भाजपा से दोस्ती के बाद लोकसभा टिकट के बाॅटवारे में हाशिये में फेके गए सुहेलदेव पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर इस स्थिति पर उतर आए है कि ‘‘ न खाबें न खाबे दियाब ’’। ओमप्रकाश राजभर की पार्टी पूर्वाचल के 26 जनपदों में भाजपा के लिए सिरदर्द साबित हो रही हैै। प्रदेश के सलेमपुर, चंदौली, घोसी, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, आजमगढ़, लालगंज, जौनपुर, कुशीनगर, महराजगंज, संतकबीर नगर, बस्ती, डुमरियागंज, गोरखपुर, श्रावस्ती, सुल्तानपुर, भदोही, देवरिया, प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर, बांदा, फतेहपुर, बांसगांव, मछलीशहर व मिर्जापुर में ओमप्रकाश राजभर का जातिगत समीकरण कुछ हद तक मजबूत भी दिख रहा है। 
सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर कहते है कि भाजपा ने एक भी सीट न देकर मेरा नहीं, अपना नुकसान किया है। राजभर समाज को अपमानित किया है। इसलिए हमने पिछड़े व अति पिछड़ों के सम्मान के लिए चुनाव लड़ने का फैसला किया है। हमारा पूरा फोकस अपने प्रत्याशियों को मजबूती से चुनाव लड़ाने पर है।भाजपा ने घोसी लोकसभा सीट पर उम्मीदवार उतारकर सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर से सुलह-सपाटे के सारे दरवाजे एक तरह से बंद कर दिए हैं। ऐसे में राजभर भी भाजपा की राह रोकने के लिए घेराबंदी शुरू करेंगे। माना जा रहा है कि राजभर बिरादरी के प्रभाव वाली सीटों पर वह भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।सीट मिलने को लेकर नाउम्मीद हो चुके राजभर ने भाजपा पर दबाव बनाने के लिए एक सप्ताह पहले ही उन 39 सीटों पर सुभासपा उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी, जहां उनकी पार्टी का संगठन मजबूत है।
पूर्वांचल में लोकसभा की करीब 26 ऐसी सीटें हैं, जहां राजभर बिरादरी की आबादी 50 हजार से लेकर सवा दो लाख तक है। बदले हुए सियासी माहौल में राजभर ने इन 26 सीटों पर खास फोकस करने की रणनीति बनाई है। वैसे भी सरकार में शामिल होने के बाद राजभर ने इन क्षेत्रों में इतनी हैसियत तो बना ही ली है कि उनकी आवाज पर सियासी नफा-नुकसान हो सकता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार सुभासपा अध्यक्ष जातिगत समीकरण के लिहाज से राजभर बिरादरी के लिए सबसे अधिक मुफीद मानी जाने वाली 13 सीटों पर भाजपा को नुकसान पहुंचाने को लेकर रणनीति बनाने में जुटे हैं। इसके तहत ही उन्होंने इन सीटों पर राजभर बिरादरी के उम्मीदवार उतारे हैं। धौरहरा और सीतापुर में भी अर्कवंशी उम्मीदवार उतारे हैं। इन दोनों सीटों पर अर्कवंशी बिरादरी की अच्छी तादाद है और इस बिरादरी को भी राजभर की ही श्रेणी में माना जाता है। इस तरह राजभर कुल 39 सीटों पर भाजपा की घेराबंदी करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।ओमप्रकाश अब सुभासपा उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए निकल चुके हैं। सभाओं में वह भाजपा द्वारा सुभासपा के साथ किए जा रहे सौतेले व्यवहार के बारे में ही बिरादरी को बताने में जुटे हैं।उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि वह बिरादरी के नाम पर सिर्फ एक सीट मांग रहे थे, लेकिन भाजपा ने राजभरों के बजाय कुर्मी जाति को सम्मान दिया है। वह अपने लोगों को यह बताकर भी सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहे हैं कि राजभर बिरादरी की आवाज दबाने के लिए ही भाजपा उनकी राजनीति को खत्म करने की कोशिश कर रही है। माना जा रहा है कि ओमप्रकाश सहानुभूति के बल पर बिरादरी को एकजुट करके भाजपा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेंगे।



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