अमेरिका को चुनौती दे रहा चीन, खुद को बना रहा एशिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत
चीन के मौजूदा राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने उनके इस कथन का दिल से पालन करने की कोशिश की है।


हॉन्ग कॉन्ग : चीनी क्रांतिकारी और कम्यूनिस्ट पार्टी के दिग्गज नेता रहे माओत्से तुंग ने एक बार कहा था कि जिसके पास आर्मी है उसके पास ताकत है। चीन के मौजूदा राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने उनके इस कथन का दिल से पालन करने की कोशिश की है। उन्होंने अपनी सेना को न सिर्फ आक्रामक लड़ाकू फोर्स में तब्दील किया बल्कि कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अमेरिकी सेना को भी पीछे छोड़ दिया है। एशिया को लेकर जो बात पहले सोची भी नहीं जा सकती थी, अब वह संभव माना जा रहा है। चीनी नेता अपनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को आधुनिक बना रहे हैं। वह कई ऐसे कदम उठा रहे हैं जिससे चीन ही नहीं ग्लोबल ऑर्डर भी बदला है। 

शी ने चीन के उस पुराने सिद्धांत को किनारे कर दिया है, जिसमें कहा जाता था कि चीन को अपनी ताकत छिपाकर रखनी चाहिए। अब 'वेटिंग गेम' खत्म हो चुका है। अपने संबोधनों में शी खुलकर चाइनीज ड्रीम की बातें करते हैं। शी के अरबों डॉलर के 'बेल्ड ऐंड रोड' प्रोग्राम में भी उनकी महत्वाकांक्षा साफ झलकती है। इसके तहत वह वैश्विक कारोबार और ढांचागत नेटवर्क खड़ा करना चाहते हैं जिसके केंद्र में ड्रैगन ही होगा। उन्होंने 'मेड इन चाइना 2025' प्लान लॉन्च किया है जिसके तहत वह देश को एक हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बनाना चाहते हैं। 

भ्रष्टाचार मुक्त आर्मी की वकालत करते हुए शी ने अपनी सेना से जंग के लिए तैयार रहने और जीतने का मंत्र दिया है। भ्रष्टाचार पर सख्ती करते हुए उन्होंने 100 से ज्यादा जनरलों को पद से हटाते हुए सजा दी। दो दशकों में चीन ने अपनी सेना को काफी ताकतवर बना लिया है। पारंपरिक मिसाइलों के साथ ही चीन की नौसेना भी मजबूत हुई है। पेइचिंग अब परमाणु हथियारों से लैस मिसाइलें पनडुब्बियों से लॉन्च कर सकता है। पूर्वी एशिया हो या दक्षिण चीन सागर का क्षेत्र चीन का दखल लगातार बढ़ रहा है। 

इतिहास में पहली बार चीन की ताकत इतनी बढ़ गई है कि वह अपने तटीय समुद्री इलाकों पर दबदबा कायम किए हुए हैं। रिटायर्ड अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक समुद्री जलक्षेत्र खासतौर से ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन में संघर्ष बढ़ सकता है। US अफसर साफ कहते हैं कि शीत युद्ध के बाद आज आलम यह है कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि अमेरिका को ही बढ़त मिलेगी। 

ट्रंप प्रशासन की रक्षा नीति की समीक्षा करने वाले गैरी रॉगहीड ने कहा, 'अमेरिका हार सकता है।' रिटायर्ड ऐडमिरल रॉगहीड US नेवी में 2011 तक टॉप पोस्ट पर रहे हैं। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने और अन्य साथियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने लिखा है कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा संकट का सामना करना पड़ सकता है इसकी सबसे बड़ी वजह चीन और रूस की बढ़ती सैन्य ताकत है। 

US पैनल ने कहा, 'अमेरिकी सेना के दबदबे को ज्यादा समय तक सुनिश्चित नहीं माना जा सकता है।' ऐसे में साफ है कि शी एशिया में अमेरिकी दबदबे को खत्म करना चाहते हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा पर विदेशी नेताओं को संबोधित करते हुए 2014 में शी ने कहा था, 'एशिया के मामलों को एशिया के लोगों को ही देखना चाहिए, अपनी समस्याएं खुद सुलझानी चाहिए और उसकी सुरक्षा को बरकरार रखना चाहिए।' 


अधिक विदेश की खबरें