अयोध्या में भी राम मंदिर नहीं बन सका चुनावी मुद्दा
अयोध्या में जातिवाद बनाम राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनाव हो रहा है।


लखनऊ, (हि.स.)। भले ही भाजपा राम मंदिर मुद्दे के सहारे ही फर्श से अर्श पर आयी हो लेकिन पहली बार चुनाव से राम मंदिर का मुद्दा गायब है। वहीं अयोध्या लोकसभा में भी राम मंदिर चुनावी मुद्दा नहीं बन सका है। अयोध्या में जातिवाद बनाम राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनाव हो रहा है।
अयोध्या संसदीय सीट से भाजपा ने वर्तमान सांसद लल्लू सिंह पर दोबारा भरोसा जताया है। भाजपा नरेन्द्र मोदी के नाम पर वोट मांग रही है। वहीं सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में पूर्व मंत्री आनन्द सेन यादव चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री चुनाव मैदान में हैं। 

अयोध्या संसदीय सीट से जुड़ी विहिप की प्रतिष्ठा
अयोध्या संसदीय सीट से भाजपा से ज्यादा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिन्दू परिषद की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। इसलिए संघ परिवार अयोध्या सीट को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहती है। विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय और विहिप के पूर्व संगठन मंत्री दिनेश समेत विहिप के शीर्षस्थ पदाधिकारी अयोध्या में लगातार डेरा डाले हुए हैं। वर्तमान भाजपा सांसद व उम्मीदवार अयोध्या से लगातार कई बार विधायक भी रह चुके हैं। वह राम मंदिर आन्दोलन से शुरूआती दौर से जुड़े रहे हैं। पिछली बार विहिप के कहने पर ही लल्लू सिंह को टिकट मिला था। 

राम लहर में पहली बार विनय कटियार बने भाजपा सांसद 
अयोध्या संसदीय सीट पर राम लहर में पहली बार 1991 में भाजपा के विनय कटियार ने जीत दर्ज की। इसके बाद 1996 में भी दोबारा विनय कटियार जीतने में कामयाब रहे। जबकि दो वर्ष बाद 1998 में हुए चुनाव में सपा के टिकट पर चुनाव लड़े मित्रसेन यादव ने विनय कटियार को हरा दिया। वहीं एक वर्ष बाद 1999 में हुए चुनाव में फिर से विनय कटियार ने मित्रसेन यादव को हरा कर सांसद बन गये। अयोध्या संसदीय सीट पर सात बार कांग्रेस, चार बार भाजपा और सपा,बसपा,लोकदल और कम्युनिस्ट पार्टी ने एक-एक बार जीत दर्ज की है।

अयोध्या में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
अयोध्या संसदीय सीट पर गांधी परिवार के करीबी और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। क्षेत्र में जमीनी पकड़ और मिलनसार व्यक्तित्व के कारण डॉ. निर्मल खत्री दो बार यहां सांसद रह चुके हैं लेकिन इस बार समीकरण उनके पक्ष में नजर नहीं आ रहा है। सपा के आनन्द सेन यादव सपा बसपा वोटर और अपने पिता स्व.मित्रसेन के व्यक्तित्व की बदौलत मैदान मारने की फिराक में हैं। वहीं इस बार अयोध्या लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद लल्लू सिंह, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री और सपा बसपा गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार पूर्व मंत्री आनन्द सेन के बीच मुकाबले के आसार दिख रहे हैं।

तीन पूर्व राज्यमंत्रियों के बीच मुकाबला 
भाजपा सांसद लल्लू सिंह उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह की सरकार में पहले पर्यटन राज्यमंत्री, फिर ऊर्जा राज्यमंत्री बने थे। वहीं कांग्रेस के निर्मल खत्री छात्र जीवन में ही राजनीति से जुड़ गए। 1980 में अयोध्या से विधायक बने और कांग्रेस सरकार में राज्यमंत्री बने। इसके अलावा गठबंधन के उम्मीदवार आनंदसेन यादव वर्ष 2001 में सपा और 2007 में बसपा के टिकट पर मिल्कीपुर से विधायक चुने गए। बसपा सरकार में राज्यमंत्री पद भी संभाला। 

कांग्रेस, गठबंधन व भाजपा उम्मीदवारों के दावे
कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. निर्मल खत्री ने दावा किया है कि अयोध्या विवाद इस बार के चुनाव में चुनावी मुद्दा नहीं है। भाजपा भी इस मुद्दे को दूर रख रही है। अयोध्या से सपा उम्मीदवार आनंद सेन यादव ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस ने समाज को बांटने का काम किया है। बाबू मित्रसेन यादव ने भाजपा और कांग्रेस को चुनाव हराया था। इस बार मैं खुद चुनाव मैदान में हूं। जनता भाजपा और कांग्रेस को सबक सिखायेगी। फैजाबाद के वर्तमान सांसद व भाजपा उम्मीदवार लल्लू सिंह ने कहा कि जनता मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने का मन बना चुकी है। अयोध्या के सर्वांगीण विकास के लिए भाजपा कटिबद्ध है। भाजपा सरकार ने यह सिद्ध कर दिखाया है। इस चुनाव में भाजपा की जीत सुनिश्चित है।


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