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 कर्नाटक : भाजपा ने रचा नया इतिहास
इस बार संसदीय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार सफलता हासिल कर राज्य की राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया


बेंगलुरु: इस बार संसदीय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार सफलता हासिल कर राज्य की राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोपहर बाद तक भाजपा 24 सीटों पर जीत की ओर अग्रसर है। रूझानों के अनुसार दो सीट कांग्रेस के खाते में, जेडीएस को एक और एक भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुमलता अंबरीश के खाते में जाती हुई दिख रही है।

लोकसभा चुनाव परिणामों नेे न केवल एक्जिट पोल के रणनीतिकारों को बल्कि राजनेताओं और नागरिकों को भी चकित कर दिया है। लगभग सभी एग्जिट पोल ने भाजपा की बढ़त की भविष्यवाणी की थी, जबकि वे गठबंधन सहयोगियों के स्कोर में भिन्न थे। मंड्या सीट को लेकर अधिक भ्रमित दिखाई दिए। भारतीय जनता पार्टी उम्मीद से अधिक सीटें जीत रही है। इससे पहले कभी भी भाजपा ने कर्नाटक से इतनी सीटें नहीं जीती थीं। अस्सी के दशक के शुरुआती दिनों में उत्तर कर्नाटक, मुंबई और हैदराबाद क्षेत्र, जनता पार्टी और जनता दल के मजबूत गढ़ बने हुए थे और नब्बे के शुरुआती दशक में इसको भारतीय जनता पार्टी ने अपने मजबूत इलाके में तब्दील कर लिया।

दूसरी ओर शहरी, अर्द्धशहरी क्षेत्रों और पूरे तटीय क्षेत्र में कुछ समय के लिए भाजपा का वोट बैंक बन गया था। लेकिन आज घोषित परिणामों से यह साबित हो गया है कि चार सीटों को छोड़कर पूरा राज्य भारतीय जनता पार्टी का गढ़ बन गया है। चुनाव प्रचार के दौरान सभी भाजपा नेताओं ने दोहराया था कि पार्टी कम से कम 22 सीटों पर जीत हासिल करेगी लेकिन राज्य के लोगों ने उन सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया है। शुरू में यह माना गया था कि जनता दल सेक्युलर मंड्या, तुमकुरु और हासन में जीतेगी लेकिन वह हासन में ही जीत पाई है जबकि मंड्या और तुमकुरु में उसको हार का मुंह देखना पड़ा है।

उस समय स्थानीय राजनीतिक हलकों में इस बात पर चर्चा हुई थी कि तुमकुरु और मंड्या दोनों में पार्टी जीत हासिल करेगी लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस तरह की धारणाएं भी गलत हो गई हैं। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा और भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने अपने विरोधियों को भारी अंतर से परास्त किया है।

इन चुनाव नतीजों ने गठबंधन के सहयोगियों के लंबे दावों को भी उजागर कर दिया है। अस्सी के दशक की शुरुआत में जब तत्कालीन मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े ने नैतिक आधार पर अपनी सरकार का त्यागपत्र दिया था और मध्यावधि चुनाव के लिए गए थे लेकिन तब से कावेरी नदी में पर्याप्त पानी बह चुका है और इन दिनों सत्ता में कोई भी राजनीति में नैतिकता की बात नहीं करता है।


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