उप्र: माया का सपा से मोहभंग! कहा-यादव वोट ट्रांसफर नहीं हुए, अब अकेले लड़ेगी बसपा
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को दिल्ली में अपने सरकारी आवास पर यूपी के पदाधिकारियों, नवनिर्वाचित सांसदों और लोकसभा चुनाव के सारे प्रत्याशियों के साथ बैठक की।


नई दिल्ली (हि.स.)। लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) पार्टी के साथ गठबंधन करने के बावजूद उत्तर प्रदेश में मिली हार के बाद सपा- बसपा के गठबंधन में दरार आ गई है। इस कड़ी में बसपा सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक सीटें नहीं आने पर बैठक कर चर्चा की। उन्होंने उत्तर प्रदेश में छह महीने बाद होने वाले 11 विधानसभा चुनावों में बसपा के अकेले लड़ने तैयारी की है।
 
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को दिल्ली में अपने सरकारी आवास पर यूपी के पदाधिकारियों, नवनिर्वाचित सांसदों और लोकसभा चुनाव के सारे प्रत्याशियों के साथ बैठक की। इस बैठक में मायावती ने चुनाव में हार के कारणों की समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार बैठक में मायावती ने कहा कि इस गठबंधन से उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में कोई लाभ नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि गठबंधन होने के बाद जो यादवों को वोट बसपा के प्रत्याशियों को मिलना चाहिए, वो वोट बसपा को नहीं मिला है। माया ने कहा कि उन्हें जाटों का वोट भी नहीं हासिल हुआ। साथ ही शिवपाल यादव ने भी यादवों का वोट काटा है।
 
सूत्रों के अनुसार बैठक में मायावती ने इसके साथ उत्तर प्रदेश में आने वाले दिनों में 11 विधानसभा चुनावों में अकेले लड़ने की भी घोषणा कर दी है । हालांकि बसपा का उपचुनाव लडऩे का फैसला चौंकाने वाला है। बसपा के इतिहास को देखें तो पार्टी उपचुनाव में प्रत्याशी नहीं उतारती। 2018 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने प्रत्याशी नहीं उतारे थे और सपा को समर्थन दिया था। इसी आधार पर लोकसभा चुनाव में भी गठबंधन बना।

लोकसभा चुनाव से उत्तर प्रदेश का किला फतह करने के लिए सपा, बसपा और आरएलडी के बीच गठबंधन हुआ था। तीनों दलों ने मिलकर यूपी में 50 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा किया था लेकिन लोकसभा चुनावों के परिणाम उम्मीदों के उलट रहा और बसपा केवल 10 सीटों पर ही जीत सकी जबकि सपा को केवल 5 सीटें मिलीं। आरएलडी ने तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे लेकिन कोई भी उम्मीदवार जीत नहीं दर्ज कर सका।  
 
बसपा सूत्रों के अनुसार मायावती के तेवर के बाद यह संकेत मिलने लगे हैं कि जल्दी ही राज्य में सपा और बसपा गठबंधन टूट जाएगा। समीक्षा बैठक में मायावाती गठबंधन से बिल्कुल नाखुश दिखीं। मायावती के उपचुनाव लड़ने के ऐलान को उनके नजरिए में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि जिन 11 सीटों पर उप चुनाव होंगे, उनमें बसपा और सपा के एक-एक विधायक जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं। इनमें जलालपुर से बसपा विधायक रितेश पांडेय अम्बेडकरनगर से चुने गए हैं और रामपुर से सपा के आजम खान सांसद बने हैं।

इन 11 सीटों पर होंगे विधानसभा उपचुनाव : 
उत्तर प्रदेश से इस बार 11 विधायक लोकसभा का चुनाव जीते हैं। लखनऊ कैंट से भाजपा विधायक डॉ. रीता बहुगुणा जोशी, आगरा के टूंडला से भाजपा विधायक एसपी सिंह बघेल, कानपुर के गोविंदनगर से बीजेपी विधायक सत्यदेव पचौरी, प्रतापगढ़ से अपना दल विधायक संगम लाल गुप्ता, सहारनपुर के गंगोह से भाजपा विधायक प्रदीप कुमार, बांदा के मानिकपुर से भाजपा आरके पटेल, बाराबंकी के जैदपुर से भाजपा विधायक उपेंद्र रावत, बहराइच के बलहा से भाजपा विधायक अक्षयवर लाल गोंड, अलीगढ़ के इगलास से भाजपा विधायक राजवीर सिंह लोकसभा चुनाव जीते हैं। रामपुर सदर से समाजवादी पार्टी के विधायक आजम खां और अंबेडकरनगर के जलालपुर से बसपा विधायक रितेश पांडेय लोकसभा का चुनाव जीते हैं। इन सभी 11 सीटों पर छह महीने के अंदर उपचुनाव होने वाले हैं। हालांकि यह साफ नहीं है कि बसपा सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी, लेकिन इतना तो तय है कि वह अकेले चुनाव लड़ेगी।


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