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सरकार का मुख्य एजेंडा आर्थिक विकास : निर्मला सीतारमण
आजादी के बाद सबसे बड़ा कर सुधार जीएसटी


नई दिल्ली: वित्त मंत्री सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि सरकार का मुख्य एजेंडा आर्थिक विकास है। बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए सीतारमण ने राज्यसभा में शुक्रवार को कहा कि इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड भी एक संरचनात्मक सुधार है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष ने सदन में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) का समर्थन किया है तो उनके बड़े नेता आज भी इसे गब्बर सिंह टैक्स क्यों कहते हैं। क्या आप ऐसे टैक्स का सपोर्ट करते हैं। 

सीतारमण ने कहा किसान सम्मान निधि भी एक ऐसा ही सुधार है। इसके साथ ही ग्रामीण, हाई-वे, आवास, पावर सेक्टर में भी कई सुधार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि डीबीटी और आधार भी एक ऐसा ही सुधार है, जिसको विपक्ष ने कानून की शक्ल में नहीं ला पाया था। सीतारमण ने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री सिर्फ चार संरचनात्मक सुधार ही गिना पाए, जबिक पिछले पांच साल के कार्यकाल में मैंने 16 ऐसे सुधार गिना दिए। 

आजादी के बाद सबसे बड़ा कर सुधार जीएसटी  
वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी सबसे बड़ा संरचनात्मक सुधार है। सीतारमण ने राज्यसभा में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब भी दिए। दरअसल पी. चिदंबरम ने इनकम टैक्स, कस्टम और जीएसटी के आकंड़ों और लक्ष्य को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे। सीतारमण ने कहा पूर्व वित्त मंत्री ने आंकड़ों को गलत ढ़ंग से पेश किया है। 

उन्होंने कहा कि सरकार ने जो लक्ष्य तय किए हैं। वह उसे हर हाल में हासिल करेंगी। इतना ही नहीं इस पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि शायद इससे भी हासिल कर लेगी। वित्त मंत्री ने कहा, जीएसटी को पारित कराने में विपक्ष ने बाधा भी पैदा की, लेकिन सरकार ने इसे संसद में मंजूरी दिलाई।

सीतारमण के इस वक्तव्य पर आपत्ति जताने लगे, जिस पर सभापति की दखल के बाद चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए पहले से ज्यादा आवंटन किया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा के लिए सरकार ने इस बार बजट 55 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 60 हजार करोड़ रुपये कर दिया है। सीतारमण ने एनपीए पर बोलते हुए कहा इससे देश की अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान होता है। इस समस्या को सुलझाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बैंकों के सामने आज वैश्विक चुनौतियां है, जिसका असर उनकी आय पर पड़ता है। वित मंत्री ने कहा कि बुनियादी ढ्रांचे को मजबूती देने के लिए सरकार का 5 साल में 100 लाख करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं।


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