राजधानी में दस के सिक्कों को लेकर फैलाया जा रहा है भ्रम
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दस के सिक्को को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है।


लखनऊ : केन्द्र सरकार द्वारा पांच सौ और एक हजार के नोटबंदी के बाद उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दस के सिक्को को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। बाजारों में धड़ल्ले से बात फैलायी जा रही है कि बिना लोगो वाले सिक्के नकली है। शहर के अमीनाबाद, कैसरबाग, अलीगंज, डालीगंज, आलमबाग, बुलाकी अड्डा, बाजारखाला, चौक जैसे पुराने मोहल्लों के बाजारों में जोरदार त​रीके से दस के सिक्कों से फुटकर व्यापारी लेनदेन कर रहे है। चौक और अमीनाबाद के व्यापारिक क्षेत्र में सिक्कों का जमकर प्रयोग हो रहा है जबकि लोगो लगे सिक्के की डिमांड ज्यादा है और बिना लोगो के सिक्के लेने से व्यापारी और नागरिक मना कर रहे है। 

एलआईयू के अधिकारी वी.के.सिंह ने बताया कि बीते दिनों जमकर नकली सिक्के बाजार में उतारे जाने की बात सामने आयी तो इसकी जांच की गयी। बाद में स्पष्ट हो गया कि बाजार में नकली सिक्के नही है। अब बाजार में जो सिक्के है, वो वर्ष 2009 के पहले के है और उसके बाद के है। इसी में जनता को भ्रमित किया जा रहा है। 

लखनऊ के व्यापारी नेता प्रभु जालान ने कहा कि जब पांच सौ और एक हजार के नोट बंद हुये तो कुछ दिनों तक रूपयों की साटेज में दस के सिक्कों को लेने से कुछ लोगों ने इन्कार किया। बाद में व्यापारियों ने सिक्के से लेनदेन शुरू कर दिया। जनता में भ्रम की स्थिती व्यापत है और दुकानदारों से लेने से इन्कार करते है। वहीं दुकानदारों द्वारा उन्हें समझाया जा रहा है। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी अपील में कहा गया है कि रिजर्व बैंक किसी भी प्रकार का दस का सिक्का लेगा। आमजन अपने खरीदारी में खुलकर दस के सिक्कों का इस्तेमाल करें। बाजार में चल रहा कोई भी सिक्का नकली नही है। 

रिजर्व बैंक ने हिदायत देते हुये कहा है कि झूठी अफवाहों को लोग अनसुना करें और उस पर ध्यान न दें। दस के सिक्कों को रिजर्व बैंक कानूनी मुद्रा मानता है, उसे उपयोग करे। बता दें कि देश में दस के सिक्कोे का चलन 1870 में आया। इसके बाद आजाद भारत में 1969 में एक सिक्का आया। फिर सन् 1970, 71 और 72 में दस के सिक्के आये। लम्बे अंतराल के बाद सन् 2005 से 2007, सन् 2008 से 2010, सन् 2009, सन् 2010 और सन् 2011 और आखिरी बार सन् 2011 व 2012 में दस के सिक्के रिजर्व बैंक ने जारी किये। 


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