धरती से पानी निकालने की बजाय उसमें भरने का दृष्टिकोण विकसित करें : शेखावत
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत


नैनीताल : यहां जिला मुख्यालय स्थित उत्तराखंड प्रशासन अकादमी में गुरुवार को 'पर्वतीय क्षेत्रों में पीने योग्य पानी के जनसहभागिता से प्रबंधन' विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला प्रारम्भ हुई। इसमें केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश के पेयजल सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी और मुख्यमंत्री के सचिव राजीव रौतेला सहित देश के 22 प्रदेशों के जल प्रबंधन से जुड़े प्रदेशों के मुखिया, मुख्य अभियंता, हाइड्रोलाॅजिस्ट, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता स्तर के 110 अधिकारी मौजूद थे। 

इस मौके पर शेखावत ने कहा कि कार्यशाला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हर घर में नल से पीने योग्य पानी के मिशन के तहत सहभागी स्प्रिंग शेड प्रबंधन के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित की गई है। नया भारत बिना जल प्रबंधन के नहीं हो सकता है। वर्षा से पानी पूर्व की तरह ही प्राप्त हो रहा है परंतु प्रबंधन में कमी आयी है। सरकार ने देश की 15 करोड़ की आबादी को 5 वर्ष से भी कम अवधि में घर पर पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। उत्तराखंड इस कार्य में पुरस्कृत भी हुआ है। उन्होंने कहा कि पीने का पानी घर तक पहुंचे, साथ ही यह दृष्टिकोण भी बदले की जल स्रोत संरक्षित हों। 

केवल जमीन से पानी निकालने की आदत को छोड़ने और पानी का ट्रीटमेंट करके जमीन में पानी भरने पर कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने  कहा कि अधिकारी इस दृष्टिकोण से ही जनपद एवं ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन की योजना बनाएं। उन्होंने मिसाल देते हुए कहा कि पिछले 50 हजार वर्षों से मौजूद नैनीताल की झील को न जाने कितनी पीढ़ियों ने संरक्षित किया होगा परंतु पिछले 50 वर्षों में हमने इसे प्रदूषित किया है। कुमाऊं के आयुक्त राजीव रौतेला के कोसी नदी के संरक्षण के प्रयास की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि पहाड़ का पानी व जवानी पहाड़ के काम नहीं आती, इस धारणा को बदलने की जरूरत है। देश मे 260 करोड़ हाथ हैं, वे जुट जाएं तो जल संरक्षण कर देश को जल समृद्ध बनाएं व माताओं-बहनों के जीवन का कष्ट घटाएं। 

इस मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि लक्ष्य और उद्देश्य तथा जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव बड़े हैं परन्तु 4.5 साल में यह लक्ष्य पूरा करने के प्रति हम पूरी तरह आशान्वित हैं। हमारी सरकार ने आते ही राज्य के 20 लाख शौचालयों के सिस्टन में बिना बजट के एक लीटर की बोतलें डालकर  प्रतिदिन एक करोड़ लीटर पानी बचाने का अभियान चलाया था। हरेला पर्व पर कोसी नदी में 1.67 लाख, देहरादून में 2.5 लाख व हरेला पर 2.24 लाख पौधे लगाए गए। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इस वर्ष हरेला पर 16 जुलाई को अवकाश रहेगा और इस दिन पूरे राज्य के लोग पौधे लगाएंगे। इस मौके पर कई विधायक, केंद्र सरकार के अपर सचिव भरत लाल, प्रदेश की उप सचिव रंजीता, अपर सचिव उदय राज, रूपा, प्रो. जेएस रावत सहित कई अन्य गण्यमान्य लोग भी मौजूद थे। 


अधिक राज्य की खबरें