समाजवादी पार्टी को झाड़ पोछकर चमकाने की कवायद
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह के सिर से अध्यक्ष की ताजपोशी खिसककर अखिलेश यादव के सर पर आ गई है।


लखनऊ :  कहां तो मुलायम अपने अनुज शिवपाल के साथ बैठ अखिलेश-रामगोपाल के खिलाफ निष्कासन का फरमान सुना रहे थे, कहां अब स्वयं शिवपाल की ही विदाई। सच है, राजनीतिक स्वार्थ जो न कराएं, कम है। सपा के नए एपीसोड में पार्टी के पुराने विलेन रामगोपाल हीरो हैं और पार्टी के हीरो शिवपाल विलेन। 

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह के सिर से अध्यक्ष की ताजपोशी खिसककर अखिलेश यादव के सर पर आ गई है। जबकि प्रदेश अध्यक्ष का पद शिवपाल के पास से हटकर परिवार के ही धर्मेन्द्र यादव के खाते में जाना तय होता दिख रहा है। 

विरोधी जहां इसे मुद्दों से ध्यान भटकाने तथा अखिलेश की छवि बनाने के लिए की गई सुनियोजित कवायद करार दे रहे हैं तो सपाई इसे नई सुबह का नया सबेरा बता खुशियां मना रहे हैं। रह गयी जनता, तो उसका धर्म है प्रेमपूर्वक इस या उस द्वारा छला जाना। प्रदेश में आम चुनाव सिर पर हैं। देखना है कि जनता इस नाटक के बाद इनके छलावे में आती है या नहीं। 


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